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    गेहूं की कीमतों में आया 25% का उछाल! 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बाद काला सागर में हुए हमले से थमी अनाज सप्लाई की रफ्तार

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 04:01 PM (IST)

    रूस-यूक्रेन संघर्ष और काला सागर में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक गेहूं आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे कीमतें 25% बढ़ गई हैं। शिपमेंट में 40% की कमी आई है औ ...और पढ़ें

    काला सागर में हुए हमले से गेहूं सप्लाई प्रभावित (AI Image)

    काला सागर में हुए हमले से गेहूं सप्लाई प्रभावित (AI Image)

    HighLights

    1. काला सागर संघर्ष से गेहूं की वैश्विक आपूर्ति बाधित।

    2. गेहूं की कीमतों में 25% की बढ़ोतरी दर्ज।

    3. एक साल में शिपमेंट 40% से अधिक घटा।

    नई दिल्ली| रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर अब गेहूं की सप्लाई और कीमतों में देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच काला सागर में भी ड्रोन और मिसाइलों का अटैक हुआ जिसके बाद काला सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतर्राष्ट्रीय गेहूं बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2026 के मुकाबले गेहूं की कीमतों में करीब 25% की बढ़ोतरी हो चुकी है और यह पिछले दो सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

    1 साल में घट गया 40% शिपमेंट

    रिपोर्ट के मुताबिक Black Sea क्षेत्र में बढ़े सैन्य हमलों और शिपिंग में आ रही समस्याओं के कारण ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हो रही है। हाल के सप्ताहों में रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे के बंदरगाहों, जहाजों और निर्यात टर्मिनलों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे गेहूं के निर्यात पर दबाव बढ़ा है।

    IFPRI ने बीते दिनों कहा था कि रूस और यूक्रेन वर्ष 2025-26 में वैश्विक गेहूं व्यापार का लगभग 32% हिस्सा रखते हैं और अधिकांश निर्यात काला सागर के रास्ते से होता है। बढ़ते संघर्ष के कारण जुलाई के अंत तक काला सागर से कुल अनाज शिपमेंट एक साल पहले की तुलना में 40% से अधिक घट गई।

    अनाज सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता

    यूक्रेन के हमलों के बाद रूस के प्रमुख काला सागर बंदरगाह नोवोरोस्सिस्क के अनाज टर्मिनलों का ऑपरेशन भी प्रभावित हुआ, जिससे बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई। इसके बाद गेहूं वायदा कीमतों में तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि यूरोप, एशिया और अन्य क्षेत्रों में सूखे की स्थितियों ने उत्पादन को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। प्रमुख निर्यातक देशों में उत्पादन घटने और निर्यात कम होने की आशंका के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है।

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    भारत पर क्या असर होगा?

    रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष का असर भारत में भी देखने को मिलेगा। भारत वैश्विक गेहूं बाजार में एक महत्वपूर्ण उत्पादक देश है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर देश के घरेलू बाजारों में भी देखने को मिल सकता है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यदि ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो आयात करने वाले देशों की खरीद गतिविधियां बढ़ेंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में और अधिक उछाल देखने को मिल सकता है।