दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी का मालिक ये भारतीय, अब ED के शिकंजे में आई कंपनी; खुल गए राजेश एक्सपोर्ट के राज
प्रवर्तन निदेशालय ने दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी वैलकैम्बी एसए की मालिक राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के बेंगलुरु और मुंबई ...और पढ़ें

ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 परिसरों पर छापेमारी की।
HighLights
ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 परिसरों पर छापेमारी की।
फेमा उल्लंघन, विदेशी लेनदेन में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं।
स्टॉक में 40% अंतर और ₹3000 करोड़ का मामला।
आईएनएस, नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी के मालिक राजेश मेहता हैं। वह स्विट्जरलैंड स्थिति दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी वैलकैम्बी एसए (Valcambi SA) के मालिक है। इस गोल्ड रिफाइनरी में उनकी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (Rajesh Exports) का मालिकाना हक है। अब इसी कंपनी यानी राजेश एक्सपोर्ट्स पर ED का शिकंजा कसा है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ जांच के तहत बेंगलुरु और मुंबई स्थित कंपनी के 9 परिसरों पर तलाशी और जब्ती अभियान (ED searches Rajesh Exports premises) चलाया है। इसकी जानकारी बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
ED की जांच में बड़े खुलासे
ईडी की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड अपने विदेशी लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में विफल रही है।
कंपनी ने आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से जुड़े बकाया भुगतान एवं प्राप्तियों के निपटान से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, जिसके कारण इन ट्रांजेक्शन्स की वास्तविकता की जांच करना लगभग असंभव हो गया है।
ईडी के अनुसार, कंपनी द्वारा अफ्रीकी खदानों (अफ्रीकन माइंस) में किए गए 1,035 करोड़ रुपए के निवेश से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड न तो तलाशी के दौरान मिले और न ही कंपनी अब तक उन्हें उपलब्ध करा सकी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अन्य विदेशी क्षेत्रों में स्थित संदिग्ध कंपनियों के साथ व्यापारिक देनदारियों और प्राप्तियों का समायोजन (सेट-ऑफ) कर रही थी।
ईडी के मुताबिक, इन लेनदेन में शामिल राशि लगभग 3,000 करोड़ रुपए है और इसकी जांच की जा रही है। तलाशी के दौरान किए गए भौतिक सत्यापन में कंपनी के स्टॉक रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ा अंतर पाया गया।
स्टॉक में 40% का अंतर
ईडी ने बताया कि फैक्ट्री रजिस्टर में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के बीच लगभग 40 प्रतिशत का अंतर मिला है। जांच एजेंसी ने कंपनी के प्रमुख व्यावसायिक संकेतकों में भी कई असामान्य बातें पाई हैं।
उदाहरण के तौर पर, कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन को दिए जाने वाले वेतन का स्तर उसके कारोबार के आकार की तुलना में बेहद कम पाया गया। ईडी के अनुसार, कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को वर्ष 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि प्रबंध निदेशक (एमडी) को केवल लगभग 17,000 रुपए प्रति माह वेतन दिया जा रहा था।
यह स्थिति तब है जब कंपनी ने लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपए के समेकित राजस्व (कंसोलिडेटेड रेवेन्यू) की रिपोर्ट दी है। जांच में कंपनी के शेयरों में कुछ लोगों द्वारा किए गए संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड भी सामने आए हैं।
ईडी ने बताया कि इन लोगों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) द्वारा जारी लीक में भी शामिल हैं। इससे संभावित अघोषित विदेशी संबंधों (ऑफशोर लिंक) की आशंका पैदा हुई है, जिसकी जांच जारी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर "एनआरआई बेनामीदारों" का इस्तेमाल कर शेयरों में हेरफेर के जरिए 600 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजी गई। बयान में कहा गया कि मंगलवार से शुरू हुई तलाशी कार्रवाई के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। एजेंसी ने कहा कि जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और मामले में आगे की जांच अभी जारी है।
