दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी, भारतीय कंपनी है मालिक; 15 लाख करोड़ की हेराफेरी से हड़कंप, SEBI का बड़ा एक्शन
दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी की मालिक राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड पर सेबी ने वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया
HighLights
सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया।
कंपनी पर 15 लाख करोड़ राजस्व गलत जानकारी का आरोप।
चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर खरीद-बिक्री पर रोक लगी।
नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी कंपनी की मालिक भारतीय कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि कंपनी ने 15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू के साथ मिसमैनेजमेंट किया है। सीधे तौर पर कहें तो कंपनी ने 1500 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों में कथित हेरफेर, फंड के गलत इस्तेमाल और निवेशकों को भ्रामक जानकारी देने जैसे आरोप लगे हैं।
मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) और उसके चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम एकतरफा आदेश पारित किया है।
यह आदेश एक चल रही जांच के दौरान वित्तीय गलतबयानी, फंड-रूटिंग में अनियमितताओं और सहयोग न करने के शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर दिया गया है। SEBI ने अंतरिम आदेश में आरोप लगाया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के कुल रेवेन्यू के बारे में गलत जानकारी दी, जो कुल राजस्व का 99.80 प्रतिशत है।
दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी की मालिक राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड
आपको बता दें कि राजेश एक्सपोर्ट्स का नाम दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरियों में शामिल वैलकैम्बी (Valcambi) के कारण काफी चर्चित रहा है। स्विट्जरलैंड स्थित इस रिफाइनरी का अधिग्रहण कंपनी ने वर्ष 2015 में लगभग 400 मिलियन डॉलर में किया था। लेकिन अब कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
109 पन्नों के आदेश में सेबी ने कहा है कि कंपनी ने कई वर्षों तक गैर-प्रामाणिक लेनदेन दर्ज किए, खातों के समेकन में गलत तरीके अपनाए और संबंधित पक्षों से जुड़े लेनदेन की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के कुछ फंड कथित तौर पर राजेश मेहता और सिद्धार्थ मेहता के व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से भेजे गए, जबकि इसके लिए आवश्यक मंजूरी और खुलासा नहीं किया गया।
SEBI ने क्या आरोप लगाए?
सेबी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के कुछ डेरिवेटिव सौदों को अपने कारोबार की आय के रूप में दर्ज किया। इसके अलावा विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव और निवेश से मिलने वाली ब्याज आय को भी परिचालन आय के रूप में दिखाया गया। इससे कंपनी के कारोबार का आकार वास्तविकता से कहींबड़ा नजर आया।
जांच के दौरान कंपनी द्वारा अफ्रीका में सोने की खदानों में निवेश का दावा भी किया गया था। हालांकि सेबी को उपलब्ध दस्तावेजों में इस दावे की पुष्टि नहीं मिली। नियामक ने इस दावे पर भी सवाल उठाए हैं।
सेबी ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कंपनी ने कई जरूरी जानकारियां उपलब्ध नहीं कराईं और अलग-अलग समय पर विरोधाभासी जवाब दिए। इसे जांच में सहयोग न करने की श्रेणी में माना गया है।
NFRA को सेबी ने भेजी जांच के लिए सिफारिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने कंपनी के वैधानिक ऑडिटरों की भूमिका की भी जांच की सिफारिश की है और इस संबंध में मामला नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) को भेजा गया है। साथ ही राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री करने से रोक दिया गया है और नए फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया गया है।
