ईरान ने दुनिया को दिखाई 'होर्मुज जलमार्ग' की ताकत, 125 अरब डॉलर का माल समंदर में अटका दिया!
ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से 1200 से अधिक जहाज और 125 अरब डॉलर का माल फंसा रहा, जिससे वैश्विक व्यापार और भारत पर गहरा ...और पढ़ें

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकी 1200 जहाजें (AI Image)
HighLights
होर्मुज नाकाबंदी: 1200 जहाज, 125 अरब डॉलर का माल फंसा।
संघर्ष में 40 से अधिक जहाजों पर मिसाइल हमले हुए।
भारत के निर्यात और आयात पर पड़ा गंभीर प्रभाव।
नई दिल्ली| युद्ध, जहाज और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पिछले 3-4 महीनों में कई बार आपने इन विषयों पर खूब पढ़ा और सुना होगा। आपने जान लिया कि ये रास्ता दुनिया के समुद्री व्यापार के लिहाज से कितना महत्वपूर्ण है। ईरान के रास्ता रोकने के बाद से दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ा है इसके बारे में खबरें जरूर पढ़ी होंगी लेकिन अब बीमा कंपनी एलियांज द्वारा 100 दिन से अधिक चल रहे इस संघर्ष के बाद जहाजों और समंदर में फंसे सामानों का आंकड़ा सामने आया है।
1200 जहाजें और 125 अरब डॉलर का माल फंसा
फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने बीमा कंपनी एलियांज के अनुमानों के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान से जुड़े संघर्षों के शुरू होने के बाद से 100 दिनों से अधिक समय से जारी नाकाबंदी के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से लगभग 125 अरब डॉलर मूल्य का माल ले जा रहे 1,200 से अधिक मालवाहक जहाज फंसे रह गए। हालांकि हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद ग्लोबल शिपिंग रूट में सुधार होना शुरू हो गया है। लेकिन अभी भी कई तरह की अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान 40 से अधिक जहाजों पर मिसाइलों का हमला हुई है। जिसमें से अधिकांश तेल के टैंकर थे। इसमें से 14 नाविकों ने अपनी जान भी गंवाई है।
आखिर इतना जरूरी क्यों है होर्मुज जलमार्ग?
आंकड़े बताते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष से पहले होर्मुज जलमार्ग से रोजाना लगभग 135 जहाज गुजरते थे। इस संकरे जलमार्ग से विश्व के तेल और गैस भंडार का लगभग पांचवें हिस्से की आवाजाही है, जिससे यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक बन जाता है। ऊर्जा के परिवहन के अलावा दुनिया के कई एशियाई देशों का व्यापार इसी रास्ते से जुड़ा है, जिसमें भारत खास देशों में शामिल है।
भारत के लिए कितना जरूरी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
भारत दुनिया के बड़े निर्यातक देशों में शामिल है। भारत के मीट, फल-सब्जी और बासमती चावल के खरीदार ज्यादातर होर्मुज प्रायद्वीप से जुड़े देश हैं। इस रास्ते के बंद होने के बाद भारत के कई मालवाहक जहाज या तो रास्ता खुलने के इंतजार में रास्ते में फंसे रहे या कई शिपमेंट को कैंसिल करना पड़ा। बासमती चावल के ऑर्डर और कीमतों से भी कई बार समझौता करना पड़ा जिसके बाद एक्सपोर्टर्स को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा देश में डीजल, पेट्रोल और खाद के इंपोर्ट को लेकर समस्याएं सभी ने देख ली हैं। फिलहाल इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे शुरू हो रही है।