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बैंकों में आई पैसों की बाढ़, RBI की बढ़ी चिंता! महंगाई बढ़ाकर 10.3 लाख करोड़ होगा कंट्रोल; क्यों मुश्किल में आया रिजर्व बैंक?

Published: Mon, 07 Sep 2026 09:29 PM (IST)

भारतीय बैंकिंग सिस्टम में नकदी का स्तर बढ़कर ₹10.3 लाख करोड़ हो गया है, जो मई 2022 के बाद का ...और पढ़ें

बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस (AI Image)

बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस (AI Image)

HighLights

  1. बैंकिंग सिस्टम में नकदी ₹10.3 लाख करोड़ पहुंची।

  2. अतिरिक्त नकदी से महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव।

  3. RBI के पास CRR, VRRR, OMO जैसे विकल्प।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने इस समय एक असामान्य मौद्रिक नीति चुनौती खड़ी हो गई है। बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) का स्तर तेजी से बढ़कर करीब ₹10.3 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जो मई 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि इस एक्स्ट्रा नकदी को समय रहते कंट्रोल नहीं किया गया तो इससे महंगाई बढ़ने और बाजार ब्याज दरों पर दबाव बनने का खतरा पैदा हो सकता है। आप सोच रहे होंगे कि लिक्विटी बढ़ना कैसे समस्या है? दरअसल ये कई फैक्टर पर निर्भर है, जिसे आसानी से समझते हैं।

डॉलर-रुपया स्वैप का प्रभाव

3 सितंबर को बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस लगभग ₹10.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इसका प्रमुख कारण RBI की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के जरिए बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा प्रवाह और केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा परिचालनों से सिस्टम में आई अतिरिक्त नकदी है।

क्वांटम AMC की इक्विटी फंड मैनेजर स्नेहा पांडे ने मीडिया को बताया कि अगस्त में औसत रोज की अधिशेष लिक्विडिटी ₹3.67 लाख करोड़ रही, जो जुलाई के ₹1.07 लाख करोड़ की तुलना में तीन गुना से अधिक है। वहीं कोर लिक्विडिटी ₹10 लाख करोड़ के स्तर को पार कर चुकी है।

RBI के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?

बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा नकदी होने पर ओवरनाइट मनी मार्केट दरों पर दबाव पड़ता है और वे रेपो रेट से नीचे जा सकती हैं। ऐसे में RBI को अतिरिक्त नकदी को वापस खींचना पड़ता है ताकि ब्याज दरें उसकी मौद्रिक नीति के अनुरूप बनी रहें। लगातार ढीली लिक्विडिटी स्थिति महंगाई को भी बढ़ावा दे सकती है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब दुनिया के अधिकांश केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को ऊंचा बनाए हुए हैं या बेहद सावधानी से नीतिगत रुख अपना रहे हैं।

RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के कुछ सदस्यों ने भी संकेत दिया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई 5.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, ऐसे में साल के दौरान ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है।


दिसंबर तक ₹14 लाख करोड़ तक पहुंचेगी लिक्विडिटी?

केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि यदि RBI कोई विशेष लिक्विडिटी मैनेज करने का कदम नहीं उठाता है तो कोर लिक्विडिटी अगस्त मध्य के ₹8.1 लाख करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2026 तक 13 से 14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि, हालिया स्वैप व्यवस्था के तहत आए विदेशी मुद्रा प्रवाह ने पहले से ही प्रचुर मात्रा में मौजूद रुपये की लिक्विडिटी को और बढ़ा दिया है, जिससे कुछ समय के लिए ब्याज दरों पर दबाव बना हुआ है।

136 अरब डॉलर के विदेशी फ्लो ने बढ़ाई नकदी

RBI की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप योजना के तहत 31 अगस्त तक 136.37 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आया। इसमें FCNR(B) जमा का योगदान 127.23 अरब डॉलर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि इन डॉलर को रुपये में बदलने से बैंकिंग सिस्टम में बड़ी मात्रा में नकदी आई। इसके अलावा इन जमाओं को CRR और SLR से छूट मिलने के कारण यह नकदी सीधे बैंकिंग प्रणाली में पहुंची, जिससे लिक्विडिटी और बढ़ गई।

त्योहारों में मिल सकती है राहत

जानकारों का मानना है कि त्योहारों के मौसम में नकदी की मांग बढ़ने से सिस्टम से कुछ पैसा बाहर हो जाएगा। केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, दिसंबर तक सर्कुलेशन में मुद्रा (Currency in Circulation) लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये बढ़ सकती है।

इसके अलावा RBI के फॉरवर्ड मार्केट में लिए गए शॉर्ट पोजिशन की Maturity से करीब ₹3 लाख करोड़ की लिक्विडिटी भी निकल सकती है। वहीं जमा वृद्धि के कारण CRR में होने वाली बढ़ोतरी से लगभग ₹70,000 करोड़ अतिरिक्त नकदी कम हो सकती है।

RBI के पास क्या हैं विकल्प?

विशेषज्ञों के अनुसार RBI के पास अतिरिक्त नकदी को कंट्रोल करने के कई विकल्प मौजूद हैं। सबसे पहले, केंद्रीय बैंक लगातार Variable Rate Reverse Repo (VRRR) नीलामियां आयोजित कर रहा है। हाल के दिनों में RBI ने 7 दिन की 6 लाख करोड़ रुपये की VRRR नीलामी के साथ-साथ 4 लाख करोड़ रुपये की ओवरनाइट नीलामी भी की है। इसके बाद लगातार 5 लाख करोड़ और 6 लाख करोड़ रुपये की ओवरनाइट नीलामियां भी आयोजित की गईं।

राधिका राव का कहना है कि RBI अस्थायी रूप से Cash Reserve Ratio (CRR) बढ़ाने या 2023 की तरह Incremental CRR (I-CRR) लागू करने पर भी विचार कर सकता है। इससे तुरंत प्रभाव से सिस्टम की अतिरिक्त नकदी कम की जा सकती है।

OMO बिक्री भी बन सकती है बड़ा हथियार

विशेषज्ञों का मानना है कि Open Market Operations (OMO) के तहत सरकारी बॉन्ड बेचकर भी RBI नकदी को कम कर सकता है। पिछले साल RBI ने OMO खरीद के जरिए करीब ₹2 लाख करोड़ की स्थायी लिक्विडिटी सिस्टम में डाली थी। अब आवश्यकता पड़ने पर वह इस प्रक्रिया को उलट सकता है।

स्नेहा पांडे के अनुसार, वर्तमान में CRR को बढ़ाना अतिरिक्त नकदी निकालने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। फिलहाल CRR 3% पर है और RBI के पास इसे बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है।

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सख्त पॉलिसी बनाने की जरूरत

एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि RBI वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में मौद्रिक नीति को सख्त करता है, तो उसे बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी को भी नियंत्रित करना होगा ताकि बाजार ब्याज दरें रेपो रेट के करीब बनी रहें।

कुल मिलाकर,फॉरेन कैपिटल फ्लो ने भारत की बाहरी स्थिति को मजबूत किया है, लेकिन इसके साथ आई अतिरिक्त नकदी अब RBI के लिए नई चुनौती बन गई है। आने वाले महीनों में केंद्रीय बैंक के कदम यह तय करेंगे कि वह महंगाई पर नियंत्रण रखते हुए बाजार में संतुलन कैसे बनाए रखता है।