टाटा ग्रुप में मामूली नौकरी से शुरुआत, फिर CEO से चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचे; एन चंद्रा रहे समूह के 'संकटमोचक'
N. Chandrasekaran: नटराजन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है, उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। ...और पढ़ें
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40 साल के सफर पर चंद्रा का आया भावुक बयान
HighLights
एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया।
बोर्ड में असहमति के कारण पुनर्नियुक्ति से इनकार किया।
उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा।
नई दिल्ली: भारतीय कॉरपोरेट जगत से आज एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 400 अरब डॉलर के टाटा साम्राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। टाटा समूह में अपने 40 साल के लंबे और शानदार करियर के बाद, उन्होंने फैसला किया है कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद इस पद पर नहीं रहेंगे।
एक ट्रेनी से लेकर टाटा के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले 'चंद्रा' की कहानी काफी प्रेरणादायक है। एन चंद्रशेखरन ने अपना बयान जारी किया जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा क्यों दिया।
क्या कहा एन. चंद्रा ने?
अपने बयान जारी कर एन. चंद्रशेखरन ने बोर्ड के भीतर चल रही असहमति को अपनी विदाई का कारण बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि टाटा समूह में उनका 40 साल का पेशेवर जीवन पूरा हो गया है और इस महान संस्थान में योगदान देना उनके लिए एक सम्मान की बात रही है। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार (Extension) की सिफारिश की थी, जिसे टाटा संस की नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी रिकॉर्ड किया था। यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस के बोर्ड में पेश किया गया था। हालांकि, बोर्ड के एक सदस्य ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया, और सर्वसम्मति न होने के कारण चंद्रा ने खुद इस फैसले को टालने का विकल्प चुना।
एन. चंद्रशेखरन ने साफ कहा किया कि उस बोर्ड मीटिंग को 6 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। चंद्रा का मानना है कि टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है, जहां कई महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, इसलिए कर्मचारियों, निवेशकों और भागीदारों के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना बहुत जरूरी है।
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इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए, उन्होंने आज टाटा संस के बोर्ड को सूचित कर दिया है कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति (Reappointment) के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। उन्होंने बोर्ड से कहा है कि वह जल्द ही उनके उत्तराधिकारी (Succession) का फैसला कर ले ताकि कामकाज का ट्रांसफर सही तरीके से हो सके।
कैसा रहा चंद्रा का सफर
1963 में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मोहनूर में जन्मे चंद्रा का सफर खेतों से शुरू होकर देश की सबसे बड़ी कंपनी के बोर्डरूम तक पहुंचा। उन्होंने रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (REC), त्रिची से मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) की डिग्री ली और 1987 में TCS में एक सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर ट्रेनी के तौर पर कदम रखा। उनके बेहतरीन काम को देखकर उन्हें तत्कालीन TCS दिग्गज एस. रामदोराई (S. Ramadorai) का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट (Executive Assistant) बनाया गया। यहीं से उनका ग्लोबल बिजनेस विजन तैयार हुआ।
अपनी मेहनत से वह 2009 में महज 46 साल की उम्र में TCS के CEO बन गए। वह उस समय कंपनी के इतिहास में सबसे कम उम्र के सीईओ थे और उनके नेतृत्व में TCS भारत की सबसे मूल्यवान IT कंपनी बनी।
टाटा संस के 'संकटमोचक'
साल 2016-17 में जब साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद टाटा ग्रुप भारी विवादों में था, तब रतन टाटा ने चंद्रा पर भरोसा जताया। 2017 में वह टाटा संस के चेयरमैन बने। अपने शानदार कार्यकाल में उन्होंने कर्ज में डूबी एयर इंडिया (Air India) का सफल अधिग्रहण किया, Tata Neu जैसा सुपर ऐप लॉन्च किया और ग्रुप को सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी (EV) जैसे भविष्य के सेक्टर्स की ओर मोड़ा।
अब सबकी नजरें इस पर होंगी कि 'चंद्रा' की विरासत को आगे ले जाने के लिए टाटा संस किसे अपना नया चेयरमैन चुनता है।
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