मैं एक वोट से हार गया! 40 साल बाद भारी मन से छोड़ा टाटा समूह का साथ, एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफे में क्या-क्या लिखा?
एन चंद्रशेखरन ने 40 साल बाद टाटा समूह से इस्तीफा देने का एलान किया। एक लेटर में उन्होंने इस्तीफे की वजह बताई जिसके बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। ...और पढ़ें
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एन चंद्रशेखर ने बयान जारी कर बताई इस्तीफे की वजह
HighLights
एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया।
एक बोर्ड सदस्य के विरोध से पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव रुका।
40 साल बाद टाटा समूह से भावुक विदाई ली।
नई दिल्ली। 12 अगस्त 2026 का दिन टाटा समूह के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा, क्योंकि 40 सालों से इस ग्रुप का साथ दे रहे एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran)ने टाटा संस के चेयरमैन पद से अपने इस्तीफा का एलान कर दिया। एन चंद्रशेखरन, यह नाम टाटा समूह के लिए बहुत मायने रखता है। क्योंकि, उनके कार्यकाल में इस समूह ने लगातार बिजनेस में तरक्की पाई और इसका विस्तार हुआ।
एन चंद्रशेखरन ने जेआरडी टाटा से लेकर रतन टाटा की लीडरशिप में किया और फिर खुद समूह का नेतृत्व किया। एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफे को लेकर एक भावुक पोस्ट किया।
एन चंद्रशेखरन ने लेटर में क्या लिखा?
एन चंद्रशेखरन ने कहा, "मैंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का मौका मिलना मेरे लिए बेहद संतोषजनक रहा है और मैं इसके लिए आभारी हूँ। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत सम्मान और बड़ी ज़िम्मेदारी की बात रही है।"
- टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव और सिफारिश की थी, जिसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमिटी और बोर्ड ने रिकॉर्ड करके इसकी सिफारिश की थी।
- इसके बाद, 24 फरवरी, 2026 को टाटा संस बोर्ड में यह प्रस्ताव पेश किया गया। हालांकि, यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया, और सर्वसम्मति से समर्थन न मिलने के कारण मैंने इस फैसले को टालने का निर्णय लिया।
- उस बोर्ड मीटिंग को 6 महीने बीत चुके हैं और अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम चरणों में हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप का नेतृत्व करने के लिए किसी लीडर का होना तो ज़रूरी है ही, साथ ही कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी ज़रूरी है।
'नहीं चाहता दोबारा नियुक्ति'
इन हालात में, आज मैंने टाटा संस बोर्ड को बता दिया है कि 20 फरवरी 2027 को मेरा कार्यकाल खत्म होने पर मैं दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करूंगा। मैंने बोर्ड से कहा है कि वे उत्तराधिकार के बारे में जल्द फैसला लें ताकि कामकाज का सही तरीके से हस्तांतरण हो सके। मैं सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग के लिए आभारी हूं।
