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    पुर्जे-पुर्जे के लिए चीन पर निर्भर भारत ने बेचे ₹4.24 लाख करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स आयटम्स, 153वें से दूसरे नंबर पर लगाई छलांग!

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 06:12 PM (IST)

    भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 11 गुना बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया है, जिससे देश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से आग ...और पढ़ें

    इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत की बड़ी उछाल (AI Image)

    इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत की बड़ी उछाल (AI Image)

    HighLights

    1. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ पहुंचा।

    2. भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता।

    3. महिलाओं की 30% भागीदारी, डिजिटल कनेक्टिविटी में जबरदस्त वृद्धि।

    नई दिल्ली| इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के बड़े आयतक देशों में गिना जाने वाला भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, और यह बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी तक पहुंच गई है।

    ₹38,000 करोड़ से ₹4.24 लाख करोड़ पहुंचा निर्यात

    सरकार के अनुसार, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS), इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) और मॉडिफाइड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0) जैसी प्रमुख योजनाओं ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र को मजबूती दी है। इसके चलते भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था अब देश की जीडीपी में 14 फीसदी तक योगदान दे रही है।

    सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है, "इलेक्ट्रॉनिक सामान अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गए हैं, जिनका निर्यात वित्त वर्ष 2025 में 47.96 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।" इसमें आगे कहा गया है, "इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया है।"

    मोबाइल बनाने वाला दुनिया का दूसरा बड़ा देश

    रिपोर्ट में बताया गया कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। वित्त वर्ष 2014-15 में देश मोबाइल फोन निर्यात की सूची में 153वें स्थान पर था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया है। मोबाइल फोन उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2014-15 में ₹18,000 करोड़ का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹6.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

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    वहीं, मोबाइल फोन निर्यात ₹1,500 करोड़ से बढ़कर ₹2.59 लाख करोड़ हो गया, जो 165 गुना की वृद्धि को दर्शाता है। इसके साथ ही मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इस क्षेत्र में करीब 12 लाख रोजगार के अवसर बने, जिनमें लगभग 70 फीसदी महिलाओं को काम मिला।

    डिजिटल कनेक्टिविटी में तेजी से आगे बढ़ा भारत

    डिजिटल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी भारत ने जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। साल 2014 में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 25.15 करोड़ थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 109.2 करोड़ से अधिक हो गई। इसी दौरान वायरलेस डेटा की लागत ₹308 प्रति जीबी से घटकर ₹7.51 प्रति जीबी रह गई, जिससे डिजिटल सेवाएं आम लोगों के लिए बहुत आसान हुई हैं।

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    सरकार के अनुसार, मोबाइल ब्रॉडबैंड की औसत डाउनलोड स्पीड मार्च 2022 के 13.67mbps से बढ़कर दिसंबर 2025 में 132mbps हो गई। यह आंकड़ा ऊकला ग्लोबल स्पीडटेस्ट इंडेक्स पर आधारित है।

    99.9 फीसदी जिलों में 5G सेवाएं

    देश में 5G सेवाओं का विस्तार भी तेजी से हुआ है। जून 2026 तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 99.9 फीसदी जिलों में 5G सेवाएं उपलब्ध हो चुकी हैं। इसी अवधि में 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशनों की संख्या बढ़कर 5.63 लाख हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल पहुंच मजबूत हुई है। BSNL और अन्य दूरसंचार कंपनियों के माध्यम से देश के 6.31 लाख गांवों तक 4G सेवाओं का विस्तार किया जा चुका है।