भारत का असली बुलेट राजा! इस बंदे ने बदला डूबती Bullet का भाग्य; 'सिद्धार्थ' की डुग-डुग वाली सोच ने कमाल कर दिया
सिद्धार्थ लाल ने रॉयल एनफील्ड बुलेट को भारत में बंद होने से बचाया। उन्होंने क्लासिक लुक बरकरार रखते हुए इंजन को आधुनिक बनाकर बुलेट को रोड का राजा बना दिया।

सिद्धार्थ लाल ने साल 2000 में संभाली थी आइशर मोटर्स की कमान।
HighLights
बुलेट का भारत में आगमन 1950 के दशक में हुआ था।
साल 1990 के समय कंपनी भारी घाटे में थी।
सिद्धार्थ लाल ने सन 2000 में बुलेट का कायाकल्प किया।
नई दिल्ली। भारत में बुलेट बोले तो आन-बान और शान का प्रतीक है, जहां रोड पर डुग-डुग की आवाज आने लगे तो समझो बुलेट आ रही है। बुलेट का इतिहास (Bullet Bike History) करीब 100 साल पुराना है लेकिन बीच में एक वक्त ऐसा भी आया जब बुलेट भारत में बंद होने वाली थी लेकिन एक बंदे ने ऐसा होने नहीं दिया, और मानो बुलेट को नया जीवन दिया। क्या आप जानते हैं भारत के इस असली बुलेट राजा की कहानी। वैसे तो बुलेट की जनक 'रॉयल एनफील्ड' है जिसकी शुरुआत करीब 125 साल पहले इंग्लैंड में हुई थी, और पहली बुलेट बाइक 1932 में पेश की गई।
आइये आपको बताते हैं भारत में बुलेट के आगमन, पतन और फिर से उदय होने की कहानी, जिसके पीछे थे सिद्धार्थ लाल (Siddhartha Lal)
कब शुरू हुई बुलेट
बुलेट ब्रांड के तहत बाइक बनाने वाली कंपनी, रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) की शुरुआत 1901 में इंग्लैंड के रेडडिच शहर में हुई थी। दरअसल, नवंबर 1891 में बिज़नेसमैन बॉब वॉकर स्मिथ और अल्बर्ट ईडी ने हंट एंड, रेडडिच की जॉर्ज टाउनसेंड एंड कंपनी को खरीदा। टाउनसेंड कंपनी सुई बनाने वाली एक जानी-मानी और लगभग 50 साल पुरानी कंपनी थी, जिसने साइकिल बनाना शुरू किया था।
बॉब वॉकर स्मिथ ने कंपनी का पहला मोटर वाला वाहन डिज़ाइन किया, इसे 'क्वाड्रिसाइकिल' के नाम से जाना जाता था और इसमें कंपनी का अपना 1 1/2 hp का 'डी डियोन' (De Dion) इंजन लगा था। कंपनी ने अपना ट्रेडिंग नाम 'द एनफील्ड साइकिल कंपनी लिमिटेड' तय किया। ब्रिटेन में अगले 70 सालों तक इसी नाम का इस्तेमाल किया गया।
साल 1901 में पहली रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल बनाई गई। बॉब वॉकर स्मिथ और फ्रांसीसी जूल्स गोबीट द्वारा डिज़ाइन की गई इस मोटरसाइकिल को लंदन में स्टैनली साइकिल शो में लॉन्च किया गया। फिर साल 1932 में बुलेट को पेश किया किया गया।
50 के दशक में भारत आई बुलेट
ब्रिटेन में बुलेट ने 1932 में अपना जलवा बिखेरना शुरू कर दिया था। लेकिन, भारत में बुलेट 1950 के दशक में आई। दरअसल, उस समय सरकार को भारतीय सेना और पुलिस के लिए सीमाओं पर (खासकर हिमालय और रेगिस्तानी क्षेत्रों में) गश्त करने के लिए एक मजबूत और दमदार बाइक की जरूरत थी, और इसके लिए रॉयल एनफील्ड की बुलेट को चुना गया।
भारत में बुलेट के निर्माण के लिए रॉयल एनफील्ड ने मद्रास मोटर्स से करार किया। 1955 में इंग्लैंड की कंपनी ने भारत की 'मद्रास मोटर्स' के साथ मिलकर चेन्नई में 'एनफील्ड इंडिया' की स्थापना की और देश में बुलेट का निर्माण शुरू हो गया।
भारत में उदय, ब्रिटेन में पतन
इधर भारत में बुलेट निर्माण शुरू हुआ और इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी तो ब्रिटेन में रॉयल एनफील्ड दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई। क्योंकि, 1960 के दशक में Honda और Yamaha की हल्की व सस्ती बाइक्स का सामना कंपनी कर नहीं पाई और 1970 में ब्रिटेन की फैक्ट्री पूरी तरह बंद हो गई।
इधर, कुछ सालों बाद भारत में भी बुलेट के निर्माण पर संकट मंडराने लगा। क्योंकि, भारत में 1990 के अंत तक तक कंपनी भारी घाटे में थी। बुलेट में मैकेनिकल खामियों और कम माइलेज जैसी समस्याओं के चलते इसकी सेल्स बहुत गिर गई थी। ऐसे हालात में आयशर (Eicher) ग्रुप ने 1994 में बुलेट बाइक का कारोबार खरीद लिया, लेकिन वे भी बुलेट का रिवाइवल करने में असमर्थ दिखे और इस बिजनेस को बेचने का मन बना चुके थे। लेकिन, 6 साल बाद कंपनी में एंट्री हुई सिद्धार्थ लाल की..साल 2000 में आयशर ग्रुप के युवा उत्तराधिकारी सिद्धार्थ लाल ने कंपनी को बचाने का जिम्मा संभाला।
बदल दिया बुलेट का भाग्य
सिद्धार्थ लाल ने बुरी तरह डूब रही बुलेट को मानो नया जीवन दिया। उन्होंने बाइक के क्लासिक लुक और उसकी मशहूर 'डुग-डुग' आवाज में कोई बदलाव नहीं किया, बस बाइक के इंजन को पूरी तरह आधुनिक बना दिया। इंजन में लीकेज की समस्या खत्म करने के लिए गियर को दाईं तरफ से बाईं तरफ कर दिया।
बुलेट में हुए इस बदलाव के बाद इस बाइक को मानो नया जीवन मिला और देश के युवाओं में इस बाइक की दीवानगी इस कदर है कि कम माइलेज के बावजूद लाखों खर्च करके वे बुलेट को खरीदना पसंद करते हैं। बुलेट के बाजार में कई मॉडल और वेरिएंट हैं जिनकी कीमत डेढ़ लाख से लेकर 6 लाख तक है।
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सिद्धार्थ लाल की सोच ने ना सिर्फ बुलेट को बंद होने से बचाया बल्कि उसका कायाकल्प करके दुनिया में सबसे लंबे समय तक लगातार उत्पादन में रहने वाली मोटरसाइकिल बना दिया। बुलेट आज भारत के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में मिड-साइज क्रूजर मोटरसाइकिल मार्केट की बेताज बादशाह है।
