भारत की पहली गगनचुंबी इमारत, ₹87 लाख में बनी; विदेशी आर्किटेक्ट्स ने छोड़ा तो इस भारतीय ने पूरा किया सपना
23 अगस्त 1959 को चेन्नई में देश की पहली गगनचुंबी इमारत, एलआईसी बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ, जिसका निर्माण लगभग ₹87 ...और पढ़ें

साल 1959: जब इस इमारत को देखने के लिए सड़कों पर उतर आई थी जनता (AI फोटो)
HighLights
23 अगस्त 1959 को एलआईसी बिल्डिंग का उद्घाटन।
यह चेन्नई में भारत की पहली गगनचुंबी इमारत थी।
भारतीय आर्किटेक्ट एल.एम. चितले ने इसे पूरा किया।
नई दिल्ली। 23 अगस्त, 1959 को आधुनिक भारत के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जाता है। इसी दिन चेन्नई (तब मद्रास) की मुख्य सड़क, माउंट रोड पर देश की पहली गगनचुंबी इमारत, LIC बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ था। उस समय के केंद्रीय वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने हल्की बारिश के बीच एक भव्य समारोह में इस इमारत का उद्घाटन किया। 14 मंज़िला और 177 फ़ीट ऊंची इस ऐतिहासिक इमारत की एक झलक पाने के लिए सड़कों पर भारी भीड़ जमा हो गई थी।
देश की पहली 'गगनचुंबी इमारत' कितने रुपये मे बनी?
इस शानदार इमारत का विचार 1952 में यूनाइटेड इंडिया लाइफ एश्योरेंस कंपनी के चेयरमैन एम.सी.टी.एम. चिदंबरम चेट्टियार ने सोचा था। ऐसे समय में जब देश में बहुमंजिला इमारतें आम नहीं थीं, इस विशाल ढांचे के निर्माण में लगभग ₹87 लाख का खर्च आया। 52,800 वर्ग फुट में फैली और पांच ऑटोमैटिक लिफ्ट से लैस यह इमारत देश का सबसे आधुनिक कार्यस्थल बन गई, जिसमें 1,500 से अधिक कर्मचारी काम करते थे।

विदेशी आर्किटेक्ट्स हटे तो एक भारतीय ने जिम्मेदारी संभाली
इस ऐतिहासिक इमारत के बनने की कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आया जब इसके मुख्य डिज़ाइनर प्रोजेक्ट से हट गए। शुरू में, इमारत को डिज़ाइन करने की ज़िम्मेदारी लंदन के मशहूर आर्किटेक्ट्स H.J. ब्राउन और L.C. मौलिन को सौंपी गई थी। 1952 में उनकी देखरेख में काम शुरू हुआ, लेकिन 1957 में ये विदेशी आर्किटेक्ट्स अचानक पूरी तरह से प्रोजेक्ट से हट गए।
विदेशी आर्किटेक्ट्स से जुड़े फ़ैसले के बाद, भारत के इस बड़े सपने को साकार करने की ज़िम्मेदारी चेन्नई के मशहूर आर्किटेक्ट एल.एम. चितले ने उठाई। उन्होंने न सिर्फ अधूरे प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी ली, बल्कि अपनी शानदार आर्किटेक्चरल सोच और देसी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके इसे सफलतापूर्वक पूरा भी किया। चितले की देखरेख में बनी यह इमारत भारत की आत्मनिर्भरता और ग्लोबल आर्किटेक्चर की दुनिया में उसकी बढ़ती अहमियत का एक मजबूत प्रतीक बनकर उभरी।
