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E20 पर फिर बहस तेज! मिलेगी E15 ब्लेंडिंग की अनुमति? रिसर्च पेपर में सामने आई बड़ी बातें

Published: Tue, 08 Sep 2026 09:00 PM (IST)

इक्रियर के एक शोध पत्र में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में लचीलापन अपनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें E20 को ...और पढ़ें

E20 पर फिर बहस तेज (AI Image)

E20 पर फिर बहस तेज (AI Image)

HighLights

  1. इक्रियर ने इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में लचीलेपन का सुझाव दिया है।

  2. E20 को दीर्घकालिक लक्ष्य रखें, घरेलू कमी पर E15 अस्थायी विकल्प।

  3. खाद्य और पशु चारे की कीमतों पर भी ध्यान देने की सलाह।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| इन दिनों देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग फ्यूल को लेकर विवाद छिड़ा है। इसको लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं, इस पूरे मामले को लेकर इक्रियर के एक रिसर्च पेपर में यह सुझाव दिया गया है कि सरकार को इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम में फ्लैक्सबिलिटी अपनाते हुए E20 के लक्ष्य को लॉन्गटर्म उद्देश्य के रूप में बनाए रखना चाहिए। साथ ही, घरेलू स्तर पर एथनॉल की उपलब्धता कम होने पर अस्थायी रूप से E15 ब्लेंडिंग की अनुमति दी जा सकती है।

अर्थशास्त्री ने क्या सुधाव दिए?

‘फूड वर्सेस फ्यूल रीकैलिब्रेटिंग इंडियाज एथनॉल ब्लेंडिंग स्ट्रैटेजी’ टाइटल वाले रिसर्च पेपर में कहा गया कि E20 को बनाए रखने, इथेनॉल का आयात करने और अस्थायी रूप से मिश्रण घटाने के बीच चुनाव करना मौजूदा परिस्थितियों में इन विकल्पों की आर्थिक लागत के आधार पर किया जाना चाहिए।

कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी सहित अन्य लेखकों द्वारा तैयार रिसर्च पेपर में कहा गया कि इस तरह की व्यवस्था से लॉन्ग टर्म लक्ष्य से समझौता किए बिना कार्यक्रम को कृषि क्षेत्र में अस्थायी समस्याओं की प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी। भारत ने एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का तेजी से विस्तार किया है। इथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का और सरप्लस चावल जैसी कृषि जिंसों से किया जाता है।

खाद्य और पशु आहार की कीमतों पर भी ध्यान

रिसर्चमें कहा गया, कि अंतिम सुरक्षा उपाय मिश्रण की दर में ही फ्लैक्सबिलिटी होनी चाहिए। 20% का लक्ष्य लॉन्गटर्म उद्देश्य बना रह सकता है। वहीं, जिन वर्षों में घरेलू स्तर पर इथेनॉल की उपलब्धता पर्याप्त न हो या E20 को बनाए रखने की लागत खाद्य या पशु चारे की कीमतों के लिहाज से अधिक हो जाए, उन वर्षों में अस्थायी रूप से E15 मिश्रण पर विचार किया जा सकता है।’’ इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयातित कच्चा तेल, कोयला आदि पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित नवीकरणीय ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाना है।

लक्ष्य से पहले शुरू हुई E20 कार्यक्रम

सरकार ने E20 का लक्ष्य तय किया है जिसके तहत पेट्रोल में मात्रा के हिसाब से 20 प्रतिशत तक इथेनॉल होना चाहिए। भारत ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) 2025-26 में यह लक्ष्य हासिल कर लिया, जो मूल समयसीमा से पांच साल पहले है। शोधपत्र में कहा गया कि इन सभी उपायों को मिलाकर इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को अधिक अनुकूल और परिस्थितियों के अनुसार बदलने योग्य बनाया जा सकता है।

इसमें कहा गया, ‘‘जब चीनी की आपूर्ति पर्याप्त हो तो चीनी से बनने वाला इथेनॉल महत्वपूर्ण बना रह सकता है, लेकिन जब भंडार कम होने लगे तो चीनी को इथेनॉल उत्पादन में लगाने की मात्रा सीमित की जानी चाहिए।’’ शोधपत्र के अनुसार, मक्का की उत्पादकता और बाजार में आपूर्ति बढ़ने के साथ इथेनॉल की मांग का बड़ा हिस्सा मक्का से पूरा किया जाना चाहिए। वहीं, भारतीय खाद्य निगम का चावल मुख्य रूप से वास्तविक अतिरिक्त भंडार के लिए ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए लेकिन चावल का मूल्य बढ़ाकर कम से कम उसकी खरीद लागत के स्तर तक किया जाना चाहिए।

कितनी हुई इथेनॉल की खरीद?

शोधपत्र में जोर दिया गया इथेनॉल बाजार पहले ही काफी बड़ा हो चुका है। तेल विपणन कंपनियों ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 में 6.79 अरब लीटर (679.04 करोड़ लीटर), 2024-25 में 10.33 अरब लीटर (1,033.31 करोड़ लीटर) और जून 2026 तक 7.05 अरब लीटर (705.43 करोड़ लीटर) इथेनॉल खरीदा। इस पर क्रमशः करीब 48,757 करोड़ रुपये, 73,996 करोड़ रुपये और 49,577 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें जीएसटी और परिवहन लागत शामिल है।

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वित्त वर्ष 2019-20 से 2025-26 के दौरान तेल विपणन कंपनियों को आपूर्ति किए गए इथेनॉल की मात्रा 1.73 अरब लीटर (173.03 करोड़ लीटर) से बढ़कर अनुमानित 12 अरब लीटर (1,200 करोड़ लीटर) हो गई। छह साल में इसमें करीब 38 प्रतिशत की संचयी वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) रही। इसके विपरीत, शोधपत्र में कहा गया कि इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली गन्ना, मक्का और चावल जैसी कृषि जिंसों के उत्पादन में काफी धीमी गति से वृद्धि हुई।

रिसर्च पेपर के अनुसार, ‘‘इसी अवधि में मक्का उत्पादन 11.4 प्रतिशत की सीएजीआर, चावल 4.4 प्रतिशत और गन्ना 5.1 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ा।’’ इसमें कहा गया कि मिश्रण के लिए एथनॉल की मांग और उस मांग को पूरा करने के लिए कच्चे माल की आपूर्ति में वृद्धि के बीच बढ़ता अंतर खाद्य और ईंधन के बीच बढ़ते समझौते की स्थिति पैदा कर रहा है।