सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    8th Pay Commission: DA बढ़ा, लेकिन मर्ज कब होगा? OPS बहाली, रिटायरमेंट एज से मिनिमम सैलरी तक, JCM ने क्या मांगें रखीं

    Updated: Sat, 18 Apr 2026 09:05 PM (IST)

    8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 2% बढ़कर 60% हो गया है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। आठवें वेतन आयोग के लिए जेसीएम ने कई अहम ...और पढ़ें

    आठवां वेतन आयोग: डीए वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम सैलरी और ओपीएस बहाली पर जेसीएम की बड़ी मांगें

    आठवां वेतन आयोग: डीए वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम सैलरी और ओपीएस बहाली पर जेसीएम की बड़ी मांगें

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली| आठवां वेतन आयोग लागू होने से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को आखिरकार बड़ी खुशखबरी मिल ही गई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाया (DA Hike Increase) गया है। डीए में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जो 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू होगी। यानी केंद्रीय कर्मचारियों को जनवरी से अप्रैल तक का एरियर भी मिलेगा। डीए बढ़ने से चपरासी से लेकर IAS तक की सैलरी बढ़ जाएगी।

    अब सवाल यह है कि आखिर केंद्रीय कर्मचारियों का डीए मर्ज कब होगा? इसे लेकर नेशनल काउंसतिल (JCM) के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने खुलकर बात की। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने 13 अप्रैल जो जारी 51 पेज के मेमोरेंडम पर विस्तार से चर्चा की और आठवें वेतन आयोग को लेकर फिटमेंट फैक्टर, फैमिली यूनिट, ओपीएस बहाली से लेकर कर्मचारियों के तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी। 20 सवालों में बातचीत के मुख्य अंश:

    सवाल 1: फिटमेंट फैक्टर को लेकर कर्मचारी यूनियनों ने क्या फैसला लिया है?

    जवाब: 13 अप्रैल की बैठक में रेलवे, डिफेंस, और अन्य केंद्रीय विभागों की यूनियनों ने सर्वसम्मति से 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग पर मुहर लगाई है। सातवें वेतन आयोग में 2.57 का जो फैक्टर दिया गया था, उसने कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को वह मजबूती नहीं दी जिसकी उम्मीद थी। पिछले 10 वर्षों में महंगाई दर और जीवन स्तर में जो बदलाव आए हैं, उन्हें देखते हुए 3.833 का फैक्टर ही एकमात्र रास्ता है, जो कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

    सवाल 2: फिटमेंट फैक्टर तय करने का इस बार का 'साइंटिफिक' आधार क्या है?

    जवाब: इस बार का आधार '5 यूनिट' का संशोधित फॉर्मूला है। अब तक वेतन आयोग डॉ. ऑक्रॉइड फॉर्मूले के तहत 3 यूनिट (पति, पत्नी और दो बच्चे) को आधार मानता था। लेकिन आज के दौर में बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल को नजरअंदाज करना अमानवीय है। यूनियनों ने मांग की है कि एक कर्मचारी के परिवार में उसके माता-पिता को भी पूर्ण यूनिट माना जाए। इस सामाजिक बदलाव को जब हम गणित में बदलते हैं, तो फिटमेंट फैक्टर की मांग खुद-ब-खुद बढ़ जाती है।

    यह भी पढ़ें- NPS खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! पेंशन नियमों में होने जा रहा है बड़ा बदलाव, ये है सरकार का नया प्लान

    सवाल 3: फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 करने से सैलरी पर व्यावहारिक रूप से क्या असर पड़ेगा?

    जवाब: जब आप परिवार में 2 सदस्य और जोड़ते हैं, तो उनकी खुराक, स्वास्थ्य, कपड़े और रहने का खर्च भी बुनियादी गणना में शामिल होता है। सरकार की अपनी एक्सपर्ट कमेटी ने माना है कि मां-बाप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जब हम 5 लोगों की कैलोरी, उनके ब्रांडेड कपड़े और स्वास्थ्य जरूरतों का डेटा बास्केट में डालते हैं, तो न्यूनतम वेतन की गणना खुद-ब-खुद उछाल मारती है। यह केवल वेतन वृद्धि नहीं, बल्कि एक सामाजिक न्याय की मांग है।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: 3.83 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ जाएगी आपकी सैलरी? कैलकुलेशन से समझें पूरा गुणा-गणित

    सवाल 4: न्यूनतम बेसिक सैलरी (Minimum Basic Salary) कितनी होने की उम्मीद है और इसका आधार क्या है?

    जवाब: कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने ₹69,000 की मिनिमम बेसिक सैलरी की मांग रखी है। अभी यह ₹18,000 है। हमने देश भर के छोटे-बड़े शहरों, कस्बों और गांवों से बाजार भाव (Market Rates) जुटाए हैं। दाल, चावल, तेल से लेकर बच्चों की स्कूल फीस और माता-पिता की दवाइयों तक का जो खर्च निकलकर आया है, उसमें ₹69,000 से कम में एक परिवार का सम्मानजनक गुजारा मुमकिन नहीं है।

    सवाल 5: ₹18,000 से सीधे ₹69,000? क्या सरकार इस भारी वित्तीय बोझ को उठाने की स्थिति में है?

    जवाब: यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि ठोस गणित है। जब आप ₹18,000 (वर्तमान न्यूनतम बेसिक) को प्रस्तावित 3.833 फिटमेंट फैक्टर से गुणा करते हैं, तो राशि ₹69,000 ही बैठती है। रही बात संसाधनों की, तो भारत आज दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी बनने जा रहा है। अगर देश का खजाना बढ़ रहा है, तो उस खजाने को भरने वाले कर्मचारियों की जेब भी वैसी ही भरी होनी चाहिए।

    सवाल 6: लेवल-1 के कर्मचारी की शुरुआती ग्रॉस सैलरी क्या ₹1 लाख के आसपास पहुंच जाएगी?

    जवाब: यह गणना काफी सटीक है। यदि ₹69,000 बेसिक मान ली जाती है, तो उस पर 20-30% एचआरए (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और महंगाई भत्ता (DA) जुड़ेगा। भले ही डीए शुरुआत में 0% हो, फिर भी अन्य भत्ते मिलाकर एक चपरासी या हेल्पर की टेक-होम सैलरी ₹90,000 से ₹95,000 के बीच होगी। यह भारत के मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी सामाजिक क्रांति होगी।

    सवाल 7: क्या सरकार पुराना 2.57 का फिटमेंट फैक्टर ही लागू रखने की जिद कर सकती है?

    जवाब: अक्सर ऐसी खबरें उड़ाई जाती हैं ताकि कर्मचारी कम पर मान जाएं। लेकिन हम इस बार आंकड़ों के साथ तैयार हैं। 7वें वेतन आयोग की विसंगतियों ने कर्मचारियों को काफी नुकसान पहुंचाया है। यदि सरकार 2.57 पर ही टिकी रहती है, तो कर्मचारियों में भारी असंतोष पैदा होगा। आयोग को यह समझना होगा कि 10 साल में महंगाई का स्वरूप बदल चुका है।

    सवाल 8: क्या प्रधानमंत्री मोदी कर्मचारियों को इस बार कोई ऐतिहासिक 'सरप्राइज' दे सकते हैं?

    जवाब: मोदी सरकार हमेशा लीक से हटकर फैसले लेने के लिए जानी जाती है। जिस तरह सरकार ने यूपीएस (UPS) लाकर एक बीच का रास्ता निकाला, उसी तरह 8वें वेतन आयोग में भी 'फैमिली यूनिट' के तर्क को स्वीकार कर सरकार एक बड़ा सरप्राइज दे सकती है। यह सरप्राइज कर्मचारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाला होगा।

    सवाल 9: एनपीएस (NPS) और यूपीएस (UPS) के विवाद के बीच कर्मचारी अब क्या चाहते हैं?

    जवाब: कर्मचारी आज भी पुरानी पेंशन (OPS) को ही सर्वोत्तम मानते हैं। यूपीएस में सुधार हुए हैं, लेकिन 'गारंटीड पेंशन' का जो सुख ओपीएस में है, वह कहीं नहीं। हमने पे कमीशन के सामने यह मांग भी रखी है कि पेंशन को बाजार के भरोसे छोड़ने के बजाय, इसे पूरी तरह सुरक्षित और वेतन के 50% पर फिक्स किया जाना चाहिए।

    सवाल 10: छठे और सातवें वेतन आयोग की तुलना में आठवें आयोग से क्या विशेष उम्मीदें हैं?

    जवाब: छठा वेतन आयोग बेहद उदार था, जिसने चाइल्ड केयर लीव जैसे मानवीय पहलुओं को जोड़ा। सातवां आयोग थोड़ा तकनीकी और सख्त रहा। आठवें आयोग से हमारी उम्मीद है कि वह 'मॉडर्न लिविंग स्टैंडर्ड' को आधार बनाए। आज के बच्चे केवल दाल-रोटी नहीं खाते, उन्हें शिक्षा और तकनीक की भी जरूरत है। आठवां आयोग इस गैप को भरेगा, ऐसी हमें पूरी आशा है।

    सवाल 11: क्या परफॉर्मेंस के आधार पर इंक्रीमेंट (Performance Linked Increment) मिलना कर्मचारियों के हित में है?

    जवाब: सरकारी दफ्तरों में परफॉर्मेंस नापने का कोई पारदर्शी मीटर नहीं है। यदि इसे लागू किया गया, तो यह 'अफसरों की गणेश परिक्रमा' करने वालों को फायदा पहुंचाएगा और ईमानदार कर्मचारी पीछे रह जाएंगे। हम इसके खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे।

    सवाल 12: क्या रिटायरमेंट की उम्र (Retirement Age) को लेकर भी कोई खिचड़ी पक रही है?

    जवाब: फिलहाल रिटायरमेंट की उम्र को 60 से घटाकर 58 या बढ़ाकर 62 करने की कोई आधिकारिक मांग यूनियनों की तरफ से नहीं है। हमारा पूरा ध्यान फिलहाल केवल और केवल 'वेतन पुनरीक्षण' और 'पेंशन' पर है। अन्य मुद्दों पर चर्चा बाद में की जा सकती है।

    सवाल 13: डीए (DA) को बेसिक पे में मर्ज करने की क्या प्रक्रिया होगी और इससे क्या लाभ होगा?

    जवाब: जैसे ही 8वां वेतन आयोग लागू होगा, पिछला जितना भी डीए होगा, वह बेसिक में मर्ज होकर एक 'न्यू बेसिक' बनाएगा। इससे भविष्य में मिलने वाले एचआरए और ग्रेच्युटी की गणना बड़े आधार पर होगी, जिससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि में लाखों का इजाफा होगा।

    सवाल 14: ओपीएस (OPS) बहाली की मांग को लेकर यूनियनों का स्टैंड क्या है?

    जवाब: यह एक नॉन-नेगोशिएबल मांग है। हमने आयोग को स्पष्ट कर दिया है कि बिना ओपीएस के सुरक्षा के, कोई भी वेतन वृद्धि अधूरी है। कर्मचारी अपनी जवानी देश को देता है, तो बुढ़ापे में उसे सरकार का सहारा मिलना ही चाहिए।

    सवाल 15: केंद्र की वेतन वृद्धि का राज्यों पर क्या और कितना गहरा असर होगा?

    जवाब: केंद्र का वेतन आयोग हमेशा एक 'ट्रिगर' की तरह काम करता है। जैसे ही केंद्र की फाइल पर साइन होंगे, यूपी, बिहार, राजस्थान जैसे राज्यों के कर्मचारी भी सड़कों पर उतरेंगे। इससे राज्यों के बजट पर दबाव तो बढ़ेगा, लेकिन यह बाजार में नई डिमांड पैदा करेगा जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है।

    यह भी पढ़ें- 8th pay commission बड़ा अपडेट: फिटमेंट फैक्टर, फैमिली यूनिट से HRA तक, JCM ने रखीं बड़ी मांगें; कितनी बढ़ेगी सैलरी?

    सवाल 16: क्या वेतन वृद्धि से शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में भी कोई उछाल आएगा?

    जवाब: बिल्कुल। जब करोड़ों कर्मचारियों के पास खर्च करने के लिए अतिरिक्त ₹20,000-₹30,000 होंगे, तो वे घर, कार और निवेश की ओर भागेंगे। इससे रियल एस्टेट और बैंकिंग शेयरों में जबरदस्त तेजी आएगी। कंजम्पशन बढ़ने से देश की जीडीपी को भी रफ्तार मिलेगी।

    सवाल 17: नोएडा के मजदूरों और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों पर इसका क्या अप्रत्यक्ष असर होगा?

    जवाब: सरकारी सेक्टर की सैलरी हमेशा एक 'बेंचमार्क' सेट करती है। जब सरकारी न्यूनतम वेतन ₹69,000 होगा, तो प्राइवेट कंपनियां भी अपने टैलेंट को बचाने के लिए सैलरी बढ़ाने पर मजबूर होंगी। इससे पूरे देश के वेतन ढांचे में सुधार देखने को मिलेगा।

    सवाल 18: क्या महिला कर्मचारियों के लिए 'मेंस्ट्रुअल लीव' (Menstrual Leaves) जैसी आधुनिक मांगें भी शामिल हैं?

    जवाब: हां, कर्मचारी यूनियनें अब जेंडर सेंसिटिविटी पर भी काम कर रही हैं। शिव गोपाल मिश्रा ने संकेत दिया कि महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य और उनकी विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त अवकाश और सुविधाओं की मांग जस्टिस रंजना देसाई के सामने रखी गई है।

    सवाल 19:. हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य भत्तों में कितनी बढ़ोतरी का प्रस्ताव है?

    जवाब: मांग है कि सभी भत्तों को भी फिटमेंट फैक्टर के अनुपात में यानी करीब 3 गुना बढ़ाया जाए। इससे शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को महंगे किराए से राहत मिलेगी और वे एक बेहतर इलाके में रहने का सपना पूरा कर सकेंगे।

    सवाल 20: जस्टिस रंजना देसाई के साथ अगली निर्णायक बैठक कब और कहां होगी?

    जवाब: मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल है। उसके बाद मई के पहले पखवाड़े में दिल्ली में एक हाई-लेवल मीटिंग होने की संभावना है। वहां यूनियनों को अपने आंकड़ों को 'डिफेंड' करना होगा। हम इस बार पूरी तैयारी के साथ जा रहे हैं।

    यह भी पढ़ें- केंद्रीय कर्मचारियों का DA बढ़कर हुआ 60%, अश्विनी वैष्णव ने की घोषणा; चपरासी से IAS तक की कितनी बढ़ी सैलरी?