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चंपारण में मरचा धान की खेती GI Tag और FPO से चमकी, एक एकड़ में 95 हजार तक मुनाफा

Published: Fri, 09 Oct 2026 05:55 AM (GMT+05:30)

FPO Farmers Bihar: जीआई टैग मिलने के बाद पश्चिम चंपारण के मरचा धान की मांग बढ़ी है, जिससे किसान उत्पादक ...और पढ़ें

चंपारण के किसान मरचा धान की व्यावसायिक खेती कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।

चंपारण के किसान मरचा धान की व्यावसायिक खेती कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।

जागरण संवाददाता, नरकटियागंज (पश्चिमी चंपारण)। Marcha Dhan Champaran: पश्चिम चंपारण के प्रसिद्ध मरचा धान को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है।

इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPO) ने किसानों की मुश्किलों को आसान बना दिया है। एफपीओ से जुड़ने के बाद चंपारण के किसान मरचा धान की व्यावसायिक खेती कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।

जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

नरकटियागंज के कुंडीलपुर स्थित शिव मंदिर प्रांगण में चंपारण फूड प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के तत्वावधान में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

नाबार्ड के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मरचा धान को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में नाबार्ड, बैंक और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने शिरकत की।

pashchim champaran marcha dhan gi tag fpo farmer income  (3)

एफपीओ किसानों की कंपनी

नाबार्ड के डीडीएम कामेश्वर सिंह ने कहा कि एफपीओ वास्तव में किसानों की अपनी पंजीकृत कंपनी है।

इसके माध्यम से किसान सामूहिक रूप से अपनी फसल का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होगी और सामग्री थोक भाव में मिलेगी।

तकनीक और वित्तीय मदद

केवीके के प्रधान डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह ने मरचा धान की वैज्ञानिक खेती और रोग-कीट प्रबंधन की जानकारी दी।

वहीं सेंट्रल बैंक के एलडीएम राजेंद्र कुमार पांडेय ने एफपीओ को हर संभव वित्तीय सहायता देने का भरोसा दिया। रमा फाउंडेशन की टीम ने किसानों को एफपीओ सदस्यता के फायदे बताए।

जीआई टैग के फायदे

मरचा धान को जीआई टैग मिलने से इसे वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान और कानूनी सुरक्षा मिली है।

अब कोई भी बाहरी व्यापारी नकली उत्पाद को मरचा चावल बताकर नहीं बेच सकता। बाज़ार में मांग बढ़ने से किसानों को आम धान की तुलना में दोगुना-तिगुना दाम मिल रहा है।

pashchim champaran marcha dhan gi tag fpo farmer income  (1)

एक एकड़ की लागत

एक एकड़ में मरचा धान की खेती की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹14,500 से ₹17,500 आती है।

इसमें खेत की तैयारी में ₹3,000, बीज में ₹1,500 और रोपनी में ₹4,000 खर्च होते हैं। इसके अलावा खाद, सिंचाई और कटाई-मड़ाई पर लगभग ₹8,500 का खर्च आता है।

उत्पादन और सीधा मुनाफा

एक एकड़ में औसतन 12 से 15 क्विंटल मरचा धान का उत्पादन प्राप्त होता है। यदि किसान सीधे ₹4,500 प्रति क्विंटल के भाव से धान बेचते हैं, तो ₹63,000 की आय होती है। सभी खर्च निकालकर किसानों को ₹45,500 से ₹48,000 प्रति एकड़ का शुद्ध मुनाफा होता है।

प्रोसेसिंग से बंपर कमाई

धान से लगभग 65% यानी 8 से 10 क्विंटल सुगंधित मरचा चावल तैयार होता है।

जीआई टैग मिलने के बाद इसका बाजार भाव ₹120 से ₹160 प्रति किलो तक है। चावल बनाकर बेचने पर प्रसंस्करण खर्च घटाकर किसानों को ₹90,000 से ₹95,000 प्रति एकड़ तक का बंपर मुनाफा हो रहा है।

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