Prawn Farming: अब सहरसा के मीठे पानी में झींगा मछली का होगा उत्पादन, किसानों की बढ़ेगी आय
सहरसा में मत्स्य विभाग ने मीठा जल में झींगा उत्पादन की योजना बनायी है, जिससे मत्स्यपालकों को लाभ होगा।

सिमरीबख्तियारपुर में झींगापालन। फोटो जागरण

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कुंदन कुमार, सहरसा। उड़ीसा व पश्चिम बंगाल की तरह कोसी प्रभावित सहरसा में जिलाधिकारी के निर्देश पर मत्स्य विभाग ने मीठा जल में झींगा उत्पादन की योजना बनायी है। यह मछली प्रोटीन से भरपूर स्वादिष्ट होती है, जिसकी मांग देशभर में ऊंची कीमतों पर होती है।
चार से छह महीने में इसका पर्याप्त उत्पादन होता है। प्रायोगिक तौर पर इसे सिमरीबख्तियारपुर प्रखंड में शुरू किया गया है। आने वाले दिनों में इसके व्यापक उत्पादन की रणनीति तैयार की गई है।
प्रति हेक्टेयर एक हजार क्विंटल तक उत्पादन
मीठा जल में मुख्य रूप से मैकोब्रैकियम रोसेनबर्गी प्रजाति की झींगा मछली का पालन होता है। इसका रेहु, कतला, मृगल जैसी मछलियों के साथ मिश्रित पालन किया जा सकता है।
बताया जाता है कि छह महीने में झींगा मछली का प्रति हेक्टेयर एक हजार क्विंटल तक उत्पादन होता है। इसका बाजार भाव अन्य पारंपरिक मछलियों की तुलना में दो-तीन गुणा अधिक है। अन्य मछलियों के साथ इसके पालन से दोहरा लाभ हो सकता है।
स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद
यह मछली न सिर्फ स्वादिष्ट होती, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभकारी है। चिकित्सक डॉ. रंजेश कुमार सिंह कहते हैं कि झींगा मछली मांसपेशियों के लिए कारगर होती है। क्योंकि इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
इसमें आयोडीन की भी अच्छी मात्रा होती है, जो थायराइड हार्मोन के कार्य को बनाए रखने और घेंघा रोग के बचाव के लिए जरूरी है। कहा कि यह कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत है, जो हड्डियों को मजबूत करता है।
सिमरीबख्तियारपुर के सरडीहा व सकड़ा पहाड़पुर में प्रायोगिक तौर पर इसका उत्पादन शुरू किया गया है। आनेवाले दिनों में इस इलाके में बड़े पैमाने पर झींगा का उत्पादन होगा। यह मत्स्यपालकों के लिए वरदान साबित हो सकता है। -जयप्रकाश सिंह, जिला मत्स्य पदाधिकारी, सहरसा।
