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    4 शिक्षक, 108 बच्चे और 1 रूम: जगह की कमी से सड़क पर चल रही कक्षाएं; सुपौल में शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 02:33 PM (GMT+05:30)

    सुपौल के नारायणपुर पंचायत स्थित दिनाय राम अनुसूचित टोला में महादलित बच्चों का विद्यालय एक कमरे के सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है। ...और पढ़ें

    कमरा एक नामांकन 108 जगह की कमी से सड़क पर चली क्लास

    कमरा एक नामांकन 108 जगह की कमी से सड़क पर चली क्लास

    HighLights

    1. सुपौल में महादलित बच्चों का स्कूल एक कमरे में संचालित।

    2. 108 छात्र, 4 शिक्षक, जगह की भारी कमी से जूझ रहे।

    3. बच्चे सड़क पर पढ़ने को मजबूर, ग्रामीण आक्रोशित।

    संवाद सूत्र, सरायगढ़ (सुपौल)। सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। भवनहीन और भूमिहीन विद्यालयों को जमीन और भवन उपलब्ध कराने की योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

    इसके बावजूद सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड क्षेत्र के नारायणपुर पंचायत स्थित दिनाय राम अनुसूचित टोला में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। यहां महादलित वर्ग के बच्चों के लिए संचालित विद्यालय में संसाधनों की भारी कमी के कारण बच्चे सड़क पर पढ़ने को मजबूर हैं।

    विद्यालय एक छोटे से सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है, जिसमें मात्र एक कमरा उपलब्ध है। इसी कमरे में कार्यालय का काम भी होता है और मध्याह्न भोजन के लिए अनाज सहित अन्य सामग्री का भंडारण भी किया जाता है। सामग्री रखने के बाद पढ़ाई के लिए महज लगभग 15 फीट जगह ही बचती है, जहां 108 बच्चों के साथ चार शिक्षकों को किसी तरह समायोजित होना पड़ता है।

    विद्यालय के प्रधानाध्यापक सत्येंद्र कुमार, शिक्षक रूपेश कुमार, शिक्षक सचित कुमार एवं शिक्षिका रुनी कुमारी ने बताया कि ऐसी परिस्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना संभव नहीं हो पा रहा है।

    उन्होंने कहा कि सीमित जगह के कारण कुछ बच्चों को कमरे के अंदर बैठाया जाता है, जबकि बाकी बच्चों को मजबूरी में सड़क पर बैठाकर पढ़ाया जाता है। बरामदे में भी थोड़ी जगह है, लेकिन वहां भी सभी बच्चों का बैठ पाना संभव नहीं है।

    ग्रामीणों और अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि महादलित बच्चों की शिक्षा के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है। जमीनी स्तर पर न तो विद्यालय के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराई गई है और न ही भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल की गई है। अभिभावकों ने बताया कि वर्तमान स्थिति ऐसी है कि बच्चे ठीक से खड़े भी नहीं हो सकते, पढ़ाई करना तो दूर की बात है।

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    ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से विद्यालय का शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा बच्चों के लिए समुचित भवन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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