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    सहरसा में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, सड़क पर पानी भरे होने पर चारपाई के सहारे एंबुलेंस तक पहुंची प्रसूता

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 06:57 PM (IST)

    सहरसा के कुंदह पंचायत में बाढ़ के पानी में एंबुलेंस फंसने के बाद एक गर्भवती महिला को चारपाई पर लिटाकर आधा किलोमीटर दूर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। ...और पढ़ें

    खटिया पर गर्भवती को ले जाते परिजन। (वीडियो ग्रैब)

    खटिया पर गर्भवती को ले जाते परिजन। (वीडियो ग्रैब)

    HighLights

    1. गर्भवती महिला को बाढ़ में चारपाई पर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया।

    2. कोसी नदी के जलस्तर बढ़ने से एंबुलेंस रास्ते में फंस गई।

    3. यह वीडियो स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों और सरकारी दावों पर सवाल।

    संवाद सूत्र, महिषी (सहरसा)। कुंदह पंचायत से एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए आई एंबुलेंस बाढ़ के पानी में फंस गई।

    स्वजनों ने गर्भवती महिला को चारपाई पर लिटाकर लगभग आधा किलोमीटर बाढ़ के पानी में यात्रा करते हुए एंबुलेंस तक पहुंचाया। इसके बाद महिला को एंबुलेंस में सवार कर महिषी अस्पताल पहुंचाया गया।

    हालांकि, जागरण इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो बृहस्पतिवार, छह अगस्त की शाम करीब चार बजे का बताया जा रहा है।

    जानकारी अनुसार कुंदह वार्ड न-4 के निवासी विकास कुमार की 20 वर्षीय पत्नी महारानी कुमारी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई।

    परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण मुख्य सड़क और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भर गया।

    आधा किलोमीटर पहले ह रुक गई एंबुलेंस

    एंबुलेंस अपने गंतव्य से लगभग आधा किलोमीटर पहले ही रुक गई। चालक ने इसकी सूचना स्वजनों को दी। इसके बाद स्वजनों ने गर्भवती महिला को चारपाई पर लिटाकर बाढ़ के पानी में यात्रा करते हुए एंबुलेंस तक पहुंचाया।

    अंततः महिला को सरकारी एंबुलेंस सेवा का लाभ मिला और वह समय पर अस्पताल पहुंच गई, जहां उसका सुरक्षित प्रसव हुआ।

    यह वीडियो सरकार के विकास के दावों की पोल खोलता है। सरकार द्वारा ग्राम संपर्क पथ निर्माण के तहत हर गांव तक पक्की सड़क पहुंचाने के दावे के बीच बाढ़ के दौरान कोसी तटबंध के भीतर सभी गांवों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना परिजनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। बाढ़ के समय न तो जरूरतमंदों को सरकारी नाव मिल पाती है और न ही एंबुलेंस को रास्ता।

    स्वास्थ्य विभाग के दावों की भी यह वीडियो पोल खोलता है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के अस्थाई स्वास्थ्य शिविरों और नाव से चलंत स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन की वास्तविकता को उजागर करता है। बाढ़ में डूबे ग्रामीण इलाकों में मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पाती हैं।

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