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    'तिरंगे के सम्मान से लेकर कलम की ताकत तक', देशभक्ति पर पटना वीमेंस कॉलेज की छात्राओं के बेबाक बोल

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 08:59 PM (IST)

    पटना वीमेंस कॉलेज की छात्राओं ने स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच देशभक्ति और नागरिक जिम्मेदारियों पर गहन चर्चा की। ...और पढ़ें

    छात्राओं ने किया संवाद। (जागरण)

    छात्राओं ने किया संवाद। (जागरण)

    HighLights

    1. छात्राओं ने देशभक्ति और नागरिक जिम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए।

    2. जेन-जी की जवाबदेही, स्वच्छता और ट्रैफिक नियमों पर चर्चा।

    3. राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य।

    सोनाली दुबे, पटना। पटना वीमेंस कॉलेज कैंपस में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच छात्राओं के बीच तिरंगे और कार्यक्रमों को लेकर चर्चा हो रही थी।

    इसी दौरान बातचीत देशभक्ति और नागरिक की जिम्मेदारियों पर आकर ठहर गई। चर्चा तिरंगे के सम्मान से शुरू होकर व्यक्तिगत जिम्मेदारी, स्वच्छता, ट्रैफिक नियम, महिलाओं और बच्चों की मदद, जेन -जी की सोच, सरकार से जवाबदेही, विकसित भारत 2047 और कलम की ताकत तक पहुंची।

    छात्राओं की आवाज में जोश भी था और अपने हिस्से की जिम्मेदारी स्वीकार करने का साहस भी। वर्तिका ने कहा कि उनके लिए देशभक्ति भीतर से महसूस किया जाने वाला वास्तविक भाव है।

    जेन-जी के लिए देशभक्ति का मतलब जवाबदेही भी

    सौम्या व सोनल कुमारी ने कहा कि जेन-जी अब सवाल करता है और जवाबदेही की मांग करता है। अधिकारों की मांग करने के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।

    छात्रा वागीशा ने कहा कि अगर कोई सड़क पर कचरा फेंक रहा है और हम उसे असभ्य कह रहे हैं, लेकिन खुद भी वही कर रहे हैं तो यह दोहरा रवैया है।

    आयुषी आर्या ने 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य सामने रखते हुए कहा कि ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना, एंबुलेंस को रास्ता देना, परेशान महिला या बाल मजदूर की मदद करना और कचरा न फैलाना भी देश के प्रति जिम्मेदारी है।

    खुशी राज ने अपनी 2023 में लिखी और प्रकाशित कविता 'मेरा देश उन्नति करे' के जरिए राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना रखी।

    तिरंगे की गरिमा भी नागरिक जिम्मेदारी

    समिक्षा राज, खुशी कुमारी, वागीशा वारियर, जानवी, आकांक्षा, गरिमा, वंशिका राज, शुचिता श्यामा, मानसी कुमारी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बाद सड़कों पर पड़े तिरंगे चिंता का विषय हैं।

    राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखना और उसका सम्मानजनक निस्तारण करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। स्वतंत्रता सेनानी केवल हथियार उठाने वाले नहीं थे। कलम से लड़ने वाले भी थे।

    प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी रचनाओं में एकता और जागरूकता का संदेश मिलता है। उन्होंने ‘हीरा और मोती’ कहानी के जरिए एकता की ताकत को रेखांकित किया।

    आयुषी आर्या , वैष्णवी, अलीबा नदीम, अंजलि गुप्ता, मुश्कान, याशिका राज, रिचा कुमारी और स्वाति सुमन ने कहा, हम युवा वर्तमान में भी अपनी भूमिका निभाएंगे।

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