बिहार से 2 युवकों को बिना ट्रांजिट रिमांड के लेकर गई कर्नाटक पुलिस, पटना हाईकोर्ट ने DGP से मांगा जवाब
कर्नाटक पुलिस द्वारा बिहार के वैशाली से दो युवकों को बिना ट्रांजिट रिमांड के ले जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

पटना हाई कोर्ट।
HighLights
कर्नाटक पुलिस ने बिना ट्रांजिट रिमांड दो युवकों को हिरासत में लिया।
पटना हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी किया।
अदालत ने दोनों राज्यों से युवकों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
जागरण संवाददाता, पटना। बिहार के वैशाली जिले से दो युवकों को कथित तौर पर हिरासत में लेकर कर्नाटक ले जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
अदालत के समक्ष आरोप लगाया गया कि कर्नाटक पुलिस ने स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना और सक्षम अदालत से ट्रांजिट रिमांड लिए बगैर आलोक उर्फ अंबानी और अमन कुमार को हिरासत में लिया और उन्हें कर्नाटक ले गई।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद और न्यायाधीश सुनील दत्ता मिश्रा की पीठ ने मामले में कर्नाटक सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।
अदालत ने दोनों राज्यों के संबंधित अधिकारियों से मामले की पूरी प्रक्रिया और युवकों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
याचिकाकर्ता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह की ओर से अदालत को बताया गया कि 12 अगस्त 2026 को कर्नाटक पुलिस की टीम वैशाली पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में लेकर कर्नाटक चली गई।
पुलिस को नहीं दी गई गिरफ्तारी की सूचना
आरोप है कि इस दौरान स्थानीय थाना पुलिस को गिरफ्तारी की सूचना नहीं दी गई और न ही युवकों को बिहार से बाहर ले जाने के लिए सक्षम अदालत से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया गया।
याचिका में इसे गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित कानूनी मानकों का उल्लंघन बताया गया है। हाईकोर्ट ने बिहार और कर्नाटक सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है।
इसमें यह बताने को कहा गया है कि दोनों युवकों को किस आधार पर और किस कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में लिया गया, उन्हें कहां ले जाया गया और क्या गिरफ्तारी के बाद निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया गया। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी।
