पहले आने का किया था एलान, अब जीतन राम मांझी का यू टर्न; बहुजन महापंचायत के आयोजकों से की बड़ी अपील
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भोजपुर के जगदीशपुर में 5 जुलाई को प्रस्तावित बहुजन महापंचायत को फिलहाल स्थगित करने की अपील की है। पहले उन्होंने इसमे ...और पढ़ें

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी। फाइल
HighLights
मांझी ने 5 जुलाई की महापंचायत स्थगित करने की अपील की।
पहले महापंचायत में शामिल होने का एलान किया था मांझी ने।
इसे भरत तिवारी समर्थक महापंचायत का जवाब माना जा रहा।
डिजिटल डेस्क, पटना। भोजपुर के जगदीशपुर में 5 जुलाई को प्रस्तावित बहुजन महापंचायत को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है।
पहले इस कार्यक्रम में शामिल होने का एलान कर चुके हम के संरक्षक व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अब अपना रुख बदल लिया है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर महापंचायत के आयोजकों से फिलहाल कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की है।
ठीकरा हमारे ऊपर फोड़ने की साजिश
बुधवार शाम एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में मांझी ने लिखा कि राज्यहित और सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए वह भोजपुर जिले के जगदीशपुर में 5 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाली बहुजन महापंचायत के आयोजकों से आग्रह करते हैं कि वे बड़ा दिल दिखाते हुए इस महापंचायत को फिलहाल स्थगित कर दें।
उन्होंने आगे लिखा कि वर्तमान परिस्थितियों में सभी पक्षों को संयम से काम लेने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, 'कुछ लोग इस फिराक में हैं कि कुछ भी गलत हो और उसका ठीकरा हमारे सिर फोड़ दिया जाए। यह समय बड़ा दिल दिखाने का है।'
पहले किया था शामिल होने का एलान
गौरतलब है कि इससे पहले मांझी ने अपने एक्स पोस्ट में 'देश की जनता करें पुकार, बहुजन एकता अबकी बार' का नारा देते हुए 5 जुलाई को आरा पहुंचकर जगदीशपुर में आयोजित बहुजन महापंचायत में शामिल होने की घोषणा की थी।
भरत तिवारी समर्थक महापंचायत के जवाब के तौर पर देखा जा रहा आयोजन
जगदीशपुर के लाल बिहारी सिंह टोला हाईस्कूल मैदान में प्रस्तावित बहुजन महापंचायत को भरत तिवारी समर्थक महापंचायत के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले 24 जून को भरत तिवारी के समर्थन में महापंचायत आयोजित हुई थी, जिसके बाद 5 जुलाई को बहुजन महापंचायत की घोषणा की गई।
उपेंद्र कुशवाहा भी दे चुके हैं संयम बरतने की सलाह
इस मुद्दे पर उपेंद्र कुशवाहा भी संयम बरतने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जब तक न्यायिक आयोग की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह की टिप्पणी या निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
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ऐसे में मांझी के बदले रुख के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि महापंचायत के आयोजक उनकी अपील मानते हैं या फिर तय कार्यक्रम के अनुसार 5 जुलाई को आयोजन करते हैं।
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