बिहार में आईजी से लेकर एसपी तक को मिले मजिस्ट्रेट के अधिकार, असामाजिक तत्वों से भरवा सकेंगे बॉन्ड
बिहार सरकार ने पर्व-त्योहारों पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आईजी, डीआईजी और एसपी को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्रदान की हैं। ...और पढ़ें

पुलिस मुख्यालय। (जागरण)
HighLights
आईजी, डीआईजी, एसपी को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी शक्तियां मिलीं।
पर्व-त्योहारों पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
असामाजिक तत्वों से सीधे बांड भरवाने का अधिकार मिला।
राज्य ब्यूरो, जागरण, पटना। राज्य सरकार ने पर्व-त्योहार पर लगने वाले मेला व जुलूस के समय बेहतर विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस जोन एवं रेंज में प्रतिनियुक्त पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) एवं पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआइजी) और जिलों में पदस्थापित पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी (स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) की शक्ति प्रदान की है।
इसके अंतर्गत वह असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध बॉन्ड भरवाने की कार्रवाई अपने स्तर से ही कर सकेंगे। गृह विभाग आरक्षी शाखा ने इससे जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है।
इसमें कहा गया है कि संबंधित वरीय पुलिस अधिकारी सरस्वती पूजा, होली, रामनवमी, दुर्गापूजा, दीपावली, ईद, बकरीद, मुहर्रम, काली पूजा, छठ पूजा, शब-ए-बरात पर लगने वाले मेला एवं जुलूस के अवसर पर विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्ति का प्रयोग कर सकेंगे।
दरअसल, पर्व-त्योहार, मेला और जुलूस के समय विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए असामाजिक तत्वों एवं अपराधियों को चिह्नित कर उनसे बॉन्ड भरवाने की कार्रवाई की जाती है।
अभी तक यह अधिकार डीएम, एसडीएम समेत मजिस्ट्रेट रैंक के पदाधिकारियों के पास था। विभागीय समीक्षा में पाया गया कि लंबी प्रक्रिया के कारण बॉन्ड भरवाने की गति धीमी है।
इसको देखते हुए आईजी-डीआईजी और एसपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-125 से 143 तक के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार दिया गया है।
यह अधिकार रेल पुलिस रेंज के आइजी-डीआइजी और एसपी के पास नहीं होगा। जिलों में पदस्थापित एसएसपी, एसपी, सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे।
क्या होता है बॉन्ड?
यदि कोई व्यक्ति समाज में घृणा, असंतोष या भड़काऊ बातें फैलाता है, तो कार्यपालक दंडाधिकारी उससे एक वर्ष के लिए अच्छे व्यवहार का बॉन्डपत्र भरवाता है।
इसके अलावा आदतन अपराधियों से तीन वर्ष तक के लिए भी बॉन्ड भरवाया जाता है। बॉन्ड या बंधपत्र लिखित कानूनी समझौता होता है, जिसमें व्यक्ति वादा करता है कि वह तय नियमों का पालन करते हुए शांति बनाए रखेगा तथा तय तारीख को थाने में हाजिर होगा। इसके लिए तय राशि भी ली जाती है। बॉन्ड टूटने पर तय रकम जब्त करते हुए जेल भेजने का भी प्रविधान है।