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    मुजफ्फरपुर में हादसा नहीं, सिस्टम की लापरवाही ने छीनी चिकित्सक की जिंदगी, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 11:21 AM (GMT+05:30)

    मुजफ्फरपुर में सड़क पर बिखरी निर्माण सामग्री और अव्यवस्था के कारण एक युवा चिकित्सक शशांक सिंह की जान चली गई। यह घटना व्यवस्था की घोर लापरवाही और सुरक् ...और पढ़ें

    लेनिन चौक पर सड़क पर बिखरा पड़ा निर्माण सामाग्री। यहीं बाइक से दुर्घटना के शिकार हुए डाक्टर। जागरण

    लेनिन चौक पर सड़क पर बिखरा पड़ा निर्माण सामाग्री। यहीं बाइक से दुर्घटना के शिकार हुए डाक्टर। जागरण

    HighLights

    1. मुजफ्फरपुर में चिकित्सक शशांक सिंह की सड़क हादसे में मौत।

    2. सड़क पर पड़ी बालू-गिट्टी और मिट्टी बनी हादसे का कारण।

    3. बुडको व नगर निगम की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल।

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। एक युवा चिकित्सक की जिंदगी सड़क पर बिखरी बालू-गिट्टी और मिट्टी के ढेर के बीच खत्म हो गई। परिवार के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो हादसे से पहले जागती नहीं।

    शहर की सड़कों पर महीनों से बेतरतीब पड़ी निर्माण सामग्री, खुले नाले और बिना सुरक्षा इंतजाम के चल रहे निर्माण कार्य राहगीरों के लिए लगातार खतरा बने हैं। सोमवार को चक्कर चौक के पास इसी लापरवाही ने चिकित्सक शशांक सिंह की जान ले ली।

    तीन महीने से सड़क पर निर्माण सामग्री

    चक्कर चौक के पास बुडको की ओर से करीब तीन माह से नाला निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण के लिए मंगाई गई बालू-गिट्टी और नाला खोदने के बाद निकली मिट्टी सड़क पर ही जमा कर दी गई। न तो उसे हटाने की व्यवस्था की गई और न ही राहगीरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संकेतक या बैरिकेडिंग लगाई गई। इसी अव्यवस्था की चपेट में चिकित्सक आ गए।

    सड़क बनी निर्माण स्थल

    शहर में कई जगह सड़कें आवागमन के बजाय निर्माण सामग्री रखने की जगह बन गई हैं। मकान निर्माण कराने वाले लोग भी बालू, गिट्टी, ईंट और अन्य सामग्री सड़क किनारे या सड़क पर रखकर छोड़ देते हैं। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और वाहनों के साथ पैदल चलने वालों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है।

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    जिम्मेदारी तय, कार्रवाई गायब

    सड़क पर भवन निर्माण सामग्री रखने वालों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। निगम के अंचल और वार्ड निरीक्षकों को ऐसी सामग्री जब्त करने और जुर्माना लगाने का अधिकार है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह निर्माण सामग्री पड़ी रहती है। कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भी नियमों का डर खत्म होता जा रहा है।

    संवेदकों पर कौन लगाएगा अंकुश?

    नगर निगम, बुडको और पथ निर्माण विभाग की एजेंसियों की ओर से कराए जा रहे कार्यों में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। नाला या सड़क निर्माण के दौरान खोदी गई मिट्टी और अन्य सामग्री कई बार सड़क पर ही छोड़ दी जाती है। सवाल यह है कि निर्माण एजेंसियों की इस मनमानी की निगरानी कौन कर रहा है।

    हादसे के बाद भी नहीं चेते तो...

    शशांक सिंह की मौत ने शहर की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जरूरत इस बात की है कि हादसे के बाद केवल जांच और कार्रवाई की बात न हो, बल्कि शहर में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा हो।

    सड़क पर सामग्री रखने वालों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय हो। आखिर किसी और परिवार को ऐसी व्यवस्था की कीमत अपनी खुशियों से न चुकानी पड़े।

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