किशनगंज जेल में सलाखों के पीछे संवर रहा भविष्य, हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनेंगे बंदी
किशनगंज मंडल कारा बंदियों को रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारपरक प्रशिक्षण दे रहा है। कंप्यूटर, अगरबत्ती निर्माण जैसे कौशल सिखाकर उन्हें सम ...और पढ़ें

किशनगंज जेल। जागरण
HighLights
किशनगंज जेल में बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
लगभग 150 बंदियों को विभिन्न व्यावसायिक कौशल सिखाए गए हैं।
प्रशिक्षण से बंदी रिहाई के बाद आत्मनिर्भर जीवन जी सकेंगे।
अमरेंद्र कांत, किशनगंज। मंडल कारा अब केवल बंदियों को रखने का केंद्र नहीं, बल्कि उन्हें नई जिंदगी की राह दिखाने का माध्यम भी बन रहा है। जेल प्रशासन बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
इसका उद्देश्य यह है कि जेल से बाहर निकलने के बाद बंदी सम्मानजनक रोजगार अपनाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें और दोबारा अपराध की ओर न लौटें।
जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 150 बंदियों को विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षण दिए जा चुके हैं। इनमें कंप्यूटर संचालन, अगरबत्ती निर्माण, मोमबत्ती निर्माण, बकरी पालन सहित अन्य स्वरोजगार आधारित कौशल शामिल हैं।
प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं, बल्कि रोजगार शुरू करने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की भी जानकारी दी जाती है।
इसका उन्हें प्रमाण पत्र भी संबंधित विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। ताकि जेल से छूटने के बाद इन प्रमाण पत्रों के सहारे उन्हें रोजगार के साथ ही ऋण व अन्य सुविधा मिल सके।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में मंडल कारा में 628 विचाराधीन है इनमें 47 सजायाफ्ता बंदी हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य रूप से ऐसे बंदियों को शामिल किया जाता है, जो इसका लाभ उठाकर रिहाई के बाद रोजगार शुरू कर सकें।
कई बंदी कई परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में पहुंचे जेल अधीक्षक
जेल अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कई बंदी कई परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में पहुंचे। ऐसे में यदि उन्हें जेल में ही कोई हुनर सिखा दिया जाए तो रिहाई के बाद उनके लिए रोजगार के नए अवसर खुलते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने की राह आसान होती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और कारा प्रशासन का प्रयास है कि सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। इसी सोच के तहत मंडल कारा में समय-समय पर कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें नई शुरुआत का अवसर देना है, ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद अपने परिवार का भरण-पोषण स्वयं कर सकें और समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी नई पहचान बना सकें।