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    बर्गर, चाऊमीन और चिकन बिरयानी...जमुई की महिलाएं बनेंगी बिजनेस वुमेन; 20 तरह का बनाएंगी फास्ट फूड

    Updated: Fri, 27 Mar 2026 06:52 PM (IST)

    भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जमुई की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए फास्ट फूड मेकिंग की ट्रेनिंग शुरू की है। ग्रामीण स्वरोजगार ...और पढ़ें

    गोलगप्पे बनाती महिलाएं। (जागरण)

    गोलगप्पे बनाती महिलाएं। (जागरण)

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    डॉ. विभूति भूषण, जमुई। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ीं महिलाएं अब चूल्हा-चौका तक ही सीमित नहीं रहेंगी। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महिलाओं को फास्ट फूड मेकिंग की ट्रेनिंग देकर उन्हें बिजनेस वुमेन बनाने की पहल शुरू कर दी है।

    इसकी शुरुआत ग्रामीण रोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से की है, जहां इन्हें फास्ट फूड से जुड़े सभी प्रकार के आइटम को बनाने की ट्रेनिंग दी गई है ताकि ये महिलाएं स्वरोजगार करके आत्मनिर्भर बन सकें।

    ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक ने बताया कि जो महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद स्वरोजगार करने में सक्षम होंगी।

    उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत उद्योग विभाग के निर्देशन में बैंकों के माध्यम से वित्त पोषण कराकर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

    जो महिलाएं स्वरोजगार करने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होंगी, उन्हें सरकार की पहल पर जीविका द्वारा संचालित रसोई घर में भी प्लेसमेंट दिया जाएगा। इसके अलावा सरकार की देखरेख में संचालित वृद्धाश्रम के रसोई घर में भी इन्हें प्लेसमेंट दिया जाएगा।

    इसकी शुरुआत सबसे पहले बिहार के जमुई जिले से की गई है। प्रथम चरण में 31 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई है और इनका प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। इसके साथ-साथ गैस स्टोव का रखरखाव और साफ सफाई पर भी ध्यान देने की जानकारी दी गई है।

    साथ-साथ खाना बनाने के दौरान अगर किसी प्रकार की अगर किसी प्रकार की घटना घटती है तो प्राथमिक उपचार के सारे तौर तरीकों की भी जानकारी भी दी गई है।

    20 प्रकार के फास्ट फूड आइटम बनाने लिए किया गया है ट्रेंड

    फास्ट फूड आइटम बनाने के प्रशिक्षण के दौरान इन महिलाओं को वेज बिरियानी, बर्गर, चाऊमीन, मंचूरियन, मोमो, वेज पुलाव, पानी पुरी और चिकन बिरयानी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है।

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    इसके अलावा भेलपुरी, दही पूरी, विभिन्न प्रकार का कचौड़ी, प्याज पकौड़ा, सभी तरह का भाजी, नूडल्स, दही चावल, छोला-भटूरा के अलावा अंडा बिरयानी, मटन बिरयानी और अंडा तथा मटन के सभी आइटम को बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके पीछे मूल उद्देश्य यह है कि इन महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाकर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

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    प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी इन सभी महिलाओं की अगले दो वर्ष तक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से मानिटरिंग की जाएगी। यह कदम महिला आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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    अमिता तिग्गा, निदेशक, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, जमुई