बिहार की बेटियों ने गढ़ा कीर्तिमान, वर्दी पहन अपराध पर नकेल कसेंगी सगी बहनें; पिता हैं धागा कंपनी में वर्कर
गया के कोंच प्रखंड के मीठापुर गांव की दो सगी बहनों ने गरीबी और नक्सल प्रभावित क्षेत्र की चुनौतियों को पार कर बिहार पुलिस और बीएसएफ में जगह बनाई है। ...और पढ़ें

गया की दो बहनें। (जागरण)
HighLights
मीठापुर की दो बहनों ने हासिल की सफलता।
एक बिहार पुलिस, दूसरी बीएसएफ में चयनित।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा की मिसाल।
संवाद सूत्र, कोंच (गया)। कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों...। उक्त कहावत को चरितार्थ किया है कोंच प्रखंड के काबर पंचायत अन्तर्गत मीठापुर गांव की दो सगी बहनें।
दोनों बहनों में एक बिहार पुलिस तो दूसरी बीएसएफ जवान है। पिता योगेन्द्र ठाकुर अमृतसर में प्राईवेट धागा कंपनी में कार्यरत हैं। दोनों बेटियों को सुदूरवर्ती गांव से शिक्षा दिलाया।
कभी माओवाद इलाका वाला गांव मीठापुर। जहां पूर्व में इनका दबदबा था। गोलियों की गड़गड़ाहट से सारा इलाका थर-थर कांपता था। दिन के उजाले में पुलिस गश्ती करने में डरती थी। आज वहां शिक्षा का अलख जगा है, खासकर लड़कियों में।
गरीबी की जंजीरों को तोड़ा
बेखौफ होकर अपनी कामयाबी के लिए दिन-रात मेहनत करने में लगी है। आंती थाना क्षेत्र के काबर पंचायत के ग्राम मीठापुर। प्रखंड मुख्यालय से महज दस किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम के कोण पर अवस्थित है।

माता-पिता के साथ दोनों सगी बहनें।
उक्त गांव के योगेन्द्र ठाकुर की बेटियां ललसा कुमारी व दुर्गा कुमारी। गरीबी के जंजीरों को तोड़ा। दोनों बहनें पहले शिक्षित हुई। अपने मेहनत के बल पर ललसा बिहार पुलिस व दुर्गा बीएसएफ जवान बनी हैं।
ट्रेनिंग कर रही दोनों बेटियां
ललसा सुपौल में बिहार पुलिस की ट्रेनिंग कर रही है। ललसा की छोटी बहन दुर्गा पंजाब के होशियारपुर में बीएसएफ की ट्रेनिंग ले रही है। अब घर का स्थितियों में सुधार होने लगा है। वहीं दोनों बहनों के देखकर गांव की अन्य बच्चियां भी विभिन्न पदों की तैयारियाें में लगी हैं।
कभी डर से सुदूरवर्ती गांवों में लोग जाने से डरते थे। मीठापुर के पास 2003-04 में आंती थाना के वाहनों को घेरकर गोलीबारी की गई थी। कई पुलिसकर्मी घायल हो गये थे। शेष भागकर अपनी जान बचाई थी।
आज एक घर की दो-दो बेटियां पुलिस में बहाल होकर प्रखंड का नाम रोशन किया है। सरकार द्वारा उच्च माध्यमिक विद्यालय काबर को मॉडल विद्यालय में उत्क्रमण किया गया है। आसपास के बच्चों को पढ़ाई में ज्यादा रुचि जगी है।
मुझे बचपन कुछ करने का शौक था। मेरे बड़े पापा अरूण ठाकुर व बड़ी मां अरूणा देवी के सानिध्य में रहकर गांव के गलियों से गुजरकर बीएसएफ की ऊंचाई को छुआ है। वे मेरे शरीर पर बीएसएफ की वर्दी देखना चाहते थे। इस सुदूरवर्ती गांव में रहकर पढ़ाई व प्रैक्टिस किया। मेरी कामयाबी में माता-पिता के साथ-साथ गुरुजनों की अहम भूमिका है।
दुर्गा कुमारी
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मुझे देश सेवा करने का बहुत शौक था। कामयाबी का श्रेय हमारे बड़े पापा अरुण ठाकुर को जाता है। सभी स्थानों पर मुझे परीक्षा दिलाने के लिए ले जाते थे। सैलून का दुकान बंद कर देते थे। इसके अलावा मेरी बड़ी मां अरूणा देवी, मेरे माता-पिता शीला देवी व योगेन्द्र ठाकुर के साथ-साथ गुरुजनों को जाता है।
ललसा कुमारी