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    राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा में निदेशक समेत 13 पदों के लिए होगी भर्ती, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 01:19 PM (GMT+05:30)

    भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने दरभंगा के राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में निदेशक सहित 13 वैज्ञानिक, 10 तकनीकी और 8 प्रशासनिक पदों की स्वीकृति दी ह ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, दरभंगा। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा में कई महत्वपूर्ण पदों की स्वीकृति प्रदान की है। इसे मखाना अनुसंधान तथा संस्थान के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। इस स्वीकृति के अंतर्गत निदेशक पद सहित 13 विज्ञानियों के पद शामिल है।

    इसके अलावा 10 तकनीकी पद तथा आठ प्रशासनिक पदों को पुनर्नियोजन के माध्यम से भरने की अनुमति दी गई है। इस संबंध में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उपमहानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) डॉ. एसएन झा ने कहा कि निदेशक पद सहित विज्ञानी, तकनीकी एवं प्रशासनिक पदों की स्वीकृति राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    इससे संस्थान की अनुसंधान क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी तथा मखाना क्षेत्र में उन्नत तकनीकों का विकास तीव्र गति से संभव हो सकेगा। विशेष रूप से मखाना प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं यांत्रिकीकरण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति होगी। जिससे उत्पादन लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार सुनिश्चित होगा।

    रिसर्च को मिलेगा बल

    वहीं, राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। मानव संसाधन की बढ़ी हुई उपलब्धता से अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी प्रसार की गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

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    उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में संस्थान की ओर से किए गए शोध एवं प्रसार प्रयासों के फलस्वरूप बिहार में मखाना का क्षेत्र तेजी से बढ़ा है तथा किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही देश के अन्य राज्यों में भी इसका विस्तार संभव हो पाया है।

    वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में संस्थान ने अनुसंधान एवं आधारभूत संरचना के विकास में त्वरित प्रगति की है। वर्धित मानव संसाधन से मखाना अनुसंधान तथा जलीय फसलों के विविधीकरण को और बल मिलेगा।

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