छात्रा के प्यार में 'पागल' हुआ शिक्षक, नौकरी गई और भीड़ की पिटाई के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया
Student Harassment Bihar: मुजफ्फरपुर में एक निजी स्कूल के शिक्षक ने नौवीं की छात्रा को व्हाट्सएप पर परेशान किया और उसका पीछा किया। शिकायत पर नौकरी से ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। WhatsApp Harassment Case: एक निजी स्कूल का कंप्यूटर शिक्षक नौवीं की छात्रा के प्रति एकतरफा जुनून में ऐसा फंसा कि नौकरी गंवाने के साथ-साथ लोगों की पिटाई और पुलिस कार्रवाई तक बात पहुंच गई। छात्रा को महीनों से परेशान कर रहे शिक्षक को आखिरकार परिजनों और मोहल्ले के लोगों ने पकड़ लिया।
मैसेज से शुरू हुआ सिलसिला
सदर थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले की रहने वाली छात्रा को आरोपी शिक्षक लगातार वाट्सएप पर आपत्तिजनक मैसेज भेज रहा था। धीरे-धीरे यह हरकत पीछा करने तक पहुंच गई। छात्रा जब स्कूल, कोचिंग या लाइब्रेरी जाती, तो शिक्षक भी उसके पीछे-पीछे पहुंच जाता और बात करने की कोशिश करता।
परिवार को बताया तो बिछाया जाल
लगातार हो रही हरकतों से परेशान छात्रा ने पूरा मामला अपने स्वजनों को बताया। इसी बीच शिक्षक ने फिर मैसेज कर उसे मिलने के लिए बुलाया। जब छात्रा ने जवाब नहीं दिया, तो वह उसके घर के पास तक पहुंच गया। पहले से सतर्क परिजनों और स्थानीय लोगों ने मौके पर ही उसे दबोच लिया।
जमकर पिटाई, सिर फूटा
जैसे ही लोगों को पूरे मामले की जानकारी हुई, गुस्सा फूट पड़ा। शिक्षक की जमकर पिटाई की गई, जिसमें उसका सिर भी फट गया। इलाके में काफी देर तक हंगामा होता रहा।
पुलिस पहुंची, हिरासत में लिया
सूचना मिलने पर सदर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह शिक्षक को भीड़ से बचाकर हिरासत में लिया। प्राथमिक इलाज के बाद उसे थाने लाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।
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पहले ही जा चुकी नौकरी
पूछताछ में सामने आया कि छात्रा ने पहले ही स्कूल प्रबंधन से शिकायत की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रबंधन ने आरोपी शिक्षक को नौकरी से हटा दिया था। इसके बावजूद वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और छात्रा को लगातार परेशान करता रहा।
शिकायत का इंतजार, कार्रवाई जारी
पुलिस का कहना है कि अब तक पीड़ित पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं दी गई है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपने स्तर से जांच में जुटी है। वहीं, स्थानीय स्तर पर समझौते की भी चर्चा चल रही है।
घटना ने एक बार फिर स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।