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    रूस ने भारत तक ट्रेन चलाने की जताई मंशा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रास्ते रेल नेटवर्क बनाने की तैयारी

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 07:46 AM (IST)

    रूस ने हिंद महासागर तक नया रेलवे नेटवर्क विकसित करने की इच्छा जताई है। रूस सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस रेल नेटवर्क के जरिये रू ...और पढ़ें

    रूस ने हिंद महासागर तक नया रेलवे नेटवर्क विकसित करने की इच्छा जताई है (फोटो- रॉयटर)

    रूस ने हिंद महासागर तक नया रेलवे नेटवर्क विकसित करने की इच्छा जताई है (फोटो- रॉयटर)

    HighLights

    1. तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते हिंद महासागर तक रेल नेटवर्क बनाने की तैयारी

    2. रूसी कंस्ट्रक्शन कंपनियों को काम देने के साथ बोस्फोरस और होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता घटाने की कोशिश

    जेएनएन, नई दिल्ली। रूस ने हिंद महासागर तक नया रेलवे नेटवर्क विकसित करने की इच्छा जताई है। रूस सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।

    इस रेल नेटवर्क के जरिये रूस तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को जोड़ना चाहता है। साथ ही भारत तक रेल संपर्क बढ़ाने की संभावना से भी रूस ने इनकार नहीं किया है।

    रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, उप प्रधानमंत्री मारात खुशनुलिन ने कहा है कि अगर इस रेल नेटवर्क को भारत तक पहुंचाना संभव होता है तो रूस के लिए यह भी स्वीकार्य विकल्प होगा।

    उनके इस बयान को भारत के साथ जमीनी संपर्क बढ़ाने और एशियाई बाजारों तक पहुंच मजबूत करने की मॉस्को की बढ़ती कोशिश के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    समुद्री मार्गों के जोखिम कम करने की कोशिश

    रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब मॉस्को पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और यूक्रेन संघर्ष के बीच अपने व्यापार के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाश रहा है।

    नए रेल नेटवर्क से रूस को हिंद महासागर तक पहुंच का एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे बोस्फोरस और पश्चिम एशिया में होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    भारत तक यह नेटवर्क पहुंचने पर दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए समुद्री मार्ग के अलावा एक लंबा लेकिन रणनीतिक जमीनी विकल्प भी तैयार हो सकता है। यह रूस के लिए एशियाई बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और भारत के साथ आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने में उपयोगी हो सकता है।

    रूसी निर्माण कंपनियों को मिलेगा बड़ा काम

    इस परियोजना के पीछे रूस के घरेलू निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का आर्थिक पहलू भी अहम है। खुशनुलिन के मुताबिक, रूसी कंस्ट्रक्शन कंपनियां हर साल करीब सवा अरब डॉलर तक अतिरिक्त निर्माण कार्य करने की क्षमता रखती हैं।

    अगर अगले पांच वर्षों में इस स्तर का काम उपलब्ध कराया जाता है तो इससे निर्माण क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने और नए प्रोजेक्ट शुरू करने में मदद मिल सकती है।

    रूस पहले से ही भारत और अन्य एशियाई देशों के साथ परिवहन संपर्क मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यह प्रस्ताव उत्तर-दक्षिण व्यापार गलियारों को और विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।