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    भड़काऊ बयान पर घर में ही घिरे पाक रक्षा मंत्री, PoK के PM बोले- आपसे सर्टिफिकेट नहीं चाहिए

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 04:21 PM (IST)

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अपने बयान को लेकर घर में ही घिर गए हैं, जिसमें उन्होंने PoK के निवासियों को 'असली कश्मीरी' नहीं बताया था। ...और पढ़ें

    पाक रक्षा मंत्री पर भड़के फैसल मुमताज राठौर

    पाक रक्षा मंत्री पर भड़के फैसल मुमताज राठौर

    HighLights

    1. पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ PoK बयान पर घिरे।

    2. PoK PM ने कहा, पहचान के लिए सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।

    3. आसिफ को अपने विवादित बयान पर माफी मांगने को कहा।

    डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ फिर एक बार अपने विवादित बयान के चलते घिर गए हैं, लेकिन इस बार अपने घर में ही उन्हें लोगों की नफरत का सामना करना पड़ रहा है।

    ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में पाकिस्तान में ही दिए एक टीवी इंटरव्यू में कहा था, 'PoK के रावलकोट और मीरपुर के निवासी असली कश्मीरी नहीं हैं।' पाक रक्षा मंत्री के इस बयान के साथ ही बवाल खड़ा हो गया।

    पाक रक्षा मंत्री के बयान पर बवाल

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के 'प्रधानमंत्री' फैसल मुमताज राठौर ने शुक्रवार को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान की कड़ी आलोचना की।

    राठौर ने आसिफ को जवाब देते हुए कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ या किसी और से पुष्टि की जरूरत नहीं है।'

    फैसल मुमताज राठौर ने आगे कहा, 'उन जैसे बूमर्स (पुरानी सोच वाले लोग) और उनकी हरकतें लोगों को करीब लाने के बजाय उनमें फूट डाल रही हैं।'

    राठौर ने आगे कहा, 'अपनी गलती पर आलोचना झेलने के बाद, अब वह आजाद जम्मू-कश्मीर के शासन में कमियां निकालकर मामले को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।'

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    PoK PM ने माफी मांगने को कहा

    पाक रक्षा मंत्री ने बयान के बाद अपनी टिप्पणी को स्पष्ट करने की सफाई भी दी थी। ख्वाजा आसिफ ने तर्क दिया था कि कश्मीरी पहचान जन्म प्रमाण पत्र से नहीं, बल्कि बरसों के संघर्ष और बलिदान से तय होती है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसिफ ने अपना पक्ष रखते हुए PoK में शासन की विफलताओं की ओर भी इशारा किया था।

    ख्वाजा आसिफ के सफाई देने पर भी राठौर ने कहा, 'सर, अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछिए, वे आपको बता देंगे कि हमने कितना अच्छा शासन चलाया है। ज्यादा सम्मानजनक काम यह होगा कि आप मुख्य मुद्दे पर बात करें और अपनी मूल टिप्पणी के लिए माफी मांगें, न कि हमारे शासन को बलि का बकरा बनाएं।'

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