थैंक्यू इंडिया... मुआवजे की गुहार के बाद नेपाल PM के बदले सुर, मदद के लिए भारत को कहा शुक्रिया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भोटेकोशी में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत, चीन और अमेरिका से मिली तत्काल सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है।
HighLights
नेपाल पीएम बालेन शाह ने भारत को कहा शुक्रिया।
भोटेकोशी बाढ़ के बाद भारत ने भेजी थी मदद।
बचाव और राहत कार्यों में मिली सहायता महत्वपूर्ण।
डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत को शुक्रिया कहा है। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद भारत ने तुरंत मदद भेजी थी, इसके लिए ही बालेन शाह ने आभार जताया है।
बालेन शाह ने 26 अगस्त को भोटेकोशी में आई भयानक बाढ़ के बाद भारत, चीन और अमेरिका से मिली मदद के लिए शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि इस मदद ने बचाव और राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई है।
नेपाल पीएम ने कहा- थैंक्यू इंडिया
बालेन शाह ने इस आपदा के बारे में बात करते हुए कहा, 'अब तक 11,993 लोगों को बचाया जा चुका है। हम कम से कम 3,916 लोगों से संपर्क नहीं कर पाए हैं। अगले दिन, मंत्रियों का एक दल प्रभावित इलाकों में गया। मुश्किल समय में हमें भारत, चीन, अमेरिका और अन्य देशों से मदद मिली। हमें कई बैंकों से भी मदद मिली।'
संसद को संबोधित करते हुए शाह ने बाढ़ के बाद भारत और चीन की ओर से तुरंत मिली इमरजेंसी सहायता, टेक्निकल टीमें और राहत सामग्री भेजने के लिए उनका आभार जताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल में बाढ़ आने के बाद जानकारी दी थी कि उन्होंने इस भयानक बाढ़ के बाद नेपाल के अपने समकक्ष बालेन शाह से बात की और उन्हें हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिलाया।
भारत-चीन ने की हर संभव मदद
आपदा के बाद भारत ने खास खोज और बचाव सहायता की पेशकश की थी। भारतीय टीमें पनबिजली सुरंगों के आसपास बचाव कार्यों और बड़ी संख्या में हताहतों व लापता लोगों से जुड़े फोरेंसिक कार्यों में शामिल रही हैं।
चीन ने भी सीमा के अपनी तरफ बचाव और रिकवरी के काम जारी रखे हैं। बीजिंग ने गियिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग तक जाने वाले क्षतिग्रस्त G216 हाईवे को फिर से खोल दिया है, जिससे भारी मशीनरी, खोज टीमें और खास उपकरण उन इलाकों तक पहुंच पा रहे हैं, जहां पहले सिर्फ मुश्किल पहाड़ी रास्तों से ही पहुंचा जा सकता था।
नेपाल ने भारत-चीन-अमेरिका से मांगा था मुआवजा
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पारंपरिक मानवीय सहायता से हटकर भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों से जलवायु मुआवजे की मांग की थी।
खनाल ने कहा कि ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान न के बराबर है, जबकि यही देश हिमालयी पर्यावरण में बदलाव के गंभीर नतीजों का सामना कर रहा है।
वहीं अब नेपाल के प्रधानमंत्री ने मुआवजे की बात से अलग भारत-चीन और अमेरिका समेत सभी देशों को मदद करने के लिए शुक्रिया कहा है।
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