फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले में इंडियन नेशनल स्टैंड का भव्य शुभारंभ, भारतीय बाल कहानियों के जर्मन-स्पैनिश अनुवाद जारी
विश्व के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में से एक फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले 2026 में 'इंडियन नेशनल स्टैंड' का भव्य उद्घाटन ...और पढ़ें

HighLights
फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले में इंडियन नेशनल स्टैंड का उद्घाटन।
भारत-जर्मनी के 75 वर्ष के संबंधों का उत्सव।
भारतीय बाल कहानियों के जर्मन-स्पैनिश अनुवाद विमोचित।
फ्रैंकफर्ट। विश्व के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में से एक फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले 2026 में 'इंडियन नेशनल स्टैंड' का भव्य और औपचारिक उद्घाटन किया गया। भारत के कार्यवाहक महावाणिज्यदूत दीपक बंसल और प्रख्यात लेखक एवं समाजसेवी संदीप भूटोरिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर स्टैंड का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर भारत और जर्मनी के बीच कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर को रेखांकित किया गया। उद्घाटन समारोह में फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले की उपाध्यक्ष क्लाउडिया कैसर, आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह, साहित्य अकादेमी के सचिव वरुण गुलाटी, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक हितेंद्र मिश्र और केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के निदेशक प्रो. आर चंद्रशेखरन सहित साहित्य व संस्कृति जगत की कई नामचीन हस्तियां मौजूद रहीं।
भारतीय साहित्य और भाषाओं का एक साझा मंच
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT), भारत के निदेशक युवराज मलिक ने स्वागत भाषण में इंडियन नेशनल स्टैंड के उद्देश्य और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह स्टैंड किसी एक एकल प्रकाशक का नहीं, बल्कि भारत के समस्त प्रकाशकों और संपूर्ण देश की भाषाई विविधता का एक छत के नीचे प्रतिनिधित्व करता है।
भारत के कार्यवाहक महावाणिज्यदूत दीपक बंसल ने कहा कि भारत-जर्मनी संबंधों के 75वें वर्ष में मेले के भीतर भारत की यह मजबूत उपस्थिति दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और साहित्यिक आदान-प्रदान को नई मजबूती प्रदान करेगी। वहीं, संदीप भूटोरिया ने पठन-पाठन और अनुवाद के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पुस्तकें भारत की समृद्ध जीवन शैली, इतिहास और बहुसांस्कृतिक चेतना को दुनिया तक पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
प्रेमचंद और पंत की कृतियों पर केंद्रित है स्टैंड की परिकल्पना
एनबीटी के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक कुमार विक्रम ने स्टैंड के डिजाइन और विषयवस्तु की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष स्टैंड की विशेष परिकल्पना मुंशी प्रेमचंद और सुमित्रानंदन पंत जैसे भारतीय साहित्य के महान स्तंभों की रचनाओं को केंद्र में रखकर की गई है, ताकि अंतरराष्ट्रीय पाठक और युवा पीढ़ी भारतीय साहित्यिक विरासत के और करीब आ सकें।
जर्मन और स्पैनिश भाषा में गूंजेगी भारतीय बाल कहानियों की छाप
समारोह का मुख्य आकर्षण एनबीटी द्वारा प्रकाशित आधुनिक भारतीय कालजयी बाल कहानियों के जर्मन और स्पैनिश अनुवादों का आधिकारिक विमोचन रहा। इस अनुवाद श्रृंखला का उद्देश्य दुनिया भर के बाल पाठकों को भारतीय साहित्य की जड़ों से जोड़ना है।
विमोचित की गई प्रमुख पुस्तकें
- 'मिट्ठू' — मुंशी प्रेमचंद
- 'दो गौरैया' व 'चमगादड़ का रस' — भीष्म साहनी
- 'साइकिल की सवारी' — सुदर्शन
- 'बहादुर' — अमरकांत
- 'सबसे सुंदर लड़की' — विष्णु प्रभाकर
- 'कुंजी' — आचार्य शिवपूजन सहाय
यह पहल भारतीय भाषाओं की कालजयी कृतियों को वैश्विक बाजार में स्थापित करने और विदेशी पाठकों के बीच भारतीय बाल साहित्य की स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
