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हथियार घोटाले में कैसे फंसी भारतीय कंपनी, जिसकी वजह से एस्टोनिया के रक्षा मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा?

Published: Fri, 04 Sep 2026 06:54 PM (IST)

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हैनो पेवकुर ने हथियारों से जुड़े एक घोटाले के बाद इस्तीफा दे दिया है। यह घोटाला यूक्रेन के लिए आर्टिलरी शेल की खरीद से संबंधित है।

हथियार घोटाले में कैसे आया भारतीय कंपनी का नाम। (रॉयटर्स)

हथियार घोटाले में कैसे आया भारतीय कंपनी का नाम। (रॉयटर्स)

HighLights

  1. एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हैनो पेवकुर ने घोटाले पर इस्तीफा दिया।

  2. यूक्रेन के लिए हथियार खरीद में भारतीय कंपनी फंसी।

  3. यूरोपीय संघ के फंड का गलत इस्तेमाल होने का आरोप।

डिजिटल डेस्क,टालिन। यूरोपीय देश एस्टोनिया हथियारों से जुड़े एक घोटाले की चपेट में आ गया है। देश के रक्षा मंत्री हैनो पेवकुर ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

यह इस्तीफा यूक्रेन के लिए हथियारों की एक डील को लेकर दिया गया, जिसमें यूरोपीय संघ के फंड का इस्तेमाल एक ऐसी भारतीय कंपनी को भुगतान करने के लिए किया गया था, जिसका आर्टिलरी शेल बनाने का कोई पिछला अनुभव नहीं था।

इस घोटाले ने 'डेटासेल एसआरएल' नाम की कंपनी को चर्चा में ला दिया है। यह मूल रूप से एक इटैलियन कंपनी थी जिसे नागपुर स्थित 'नेको डिफेंस म्यूनिशंस' ने खरीद लिया था। अब सवाल है कि आखिर असल क्या हुआ है और इस विवाद में भारतीय कंपनी का क्या भूमिका है?

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री ने क्यों दिया इस्तीफा?

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि एस्टोनिया के नेशनल ऑडिट ऑफिस की जांच के बाद वे इस घोटाले की राजनीतिक जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं।

पेवकुर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि एस्टोनिया की सुरक्षा किसी एक व्यक्ति का प्रोजेक्ट नहीं है। यह हमारी सामुहिक जिम्मेदारी है। इसलिए मुझे आज पूरे रक्षा क्षेत्र की राजनीतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सही समय पर रक्षा मंत्री पद प्रधानमंत्री को सौंप देना चाहिए।

एस्टोनिया के पब्लिक ब्रॉकास्टर की इंग्लिश सर्विस 'EER' के अनुसार, पेवकुर के इस्तीफे के पीछे वे कई कॉन्ट्रैक्ट हैं जो एस्टोनिया ने यूक्रेन के लिए आर्टिलरी शेल खरीदने के लिए किए थे। इसके लिए यूरोपीय संघ की यूरोपीयन पीस फैसिलिटी ते फंड का इस्तेमाल किया गया था।

गोला-बारूद की सप्लाई 'डेटासेल एसआरएल' को करनी थी, जो एक इटैलियन कंपनी थी और जिसे नागपुर स्थित 'नेको डिफेंस म्यूनिशंस' ने खरीदा था। हालांकि, न तो डेटासेल और न ही इसके भारतीय मालिक ने पहले कभी वे आर्टिलरी शेल बनाए थे जिन्हें एस्टोनिया खरीदना चाहता था।

इसके बाद और भी कॉन्ट्रैक्ट हुए, जिससे कुल एडवांस पेमेंट लगभग €70 मिलियन तक पहुंच गया। गोला-बारूद की पहली खेप नवंबर 2024 में यूक्रेन पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन डिलीवरी में देरी हुई। एस्टोनिया का यह भी दावा है कि जो सामान पहुंचा, उसमें से कुछ जरूरी मानकों पर खरा नहीं उतरा।

इसके बाद एस्टोनियाई सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट रद कर दिए, जिससे अब मामला कोर्ट तक पहुंच गया है। डेटासेल का तर्क है कि अगर एस्टोनिया ने कॉन्ट्रैक्ट खत्म न किया होता, तो वह अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर सकता था।

विवाद पर कंपनी की प्रतिक्रिया

डेटासेल ने घटनाओं के बारे में एस्टोनिया के पक्ष को चुनौती दी है। हालांकि कंपनी ने माना है कि देरी हुई थी, लेकिन उनका कहना है कि यह क्वालिटी से जुड़ा मामला नहीं था।

यूराक्टिव को दिए एक बयान में, कंपनी ने बुधवार शाम कहा कि वह इस विवाद की पीड़ित है और कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आधार को खारिज कर दिया। कंपनी ने कहा कि उसने €59 मिलियन के एडवांस पेमेंट के बदले €58 मिलियन का सामान सप्लाई किया और उसका इनवॉइस भी जारी किया और कॉन्ट्रैक्ट के तहत की गई जांच में क्वालिटी से जुड़ी कोई समस्या नहीं पाई गई।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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