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हथियारों की होड़, सोने की लूट और वसूली; कांगो में M23 युद्ध की आड़ में फल-फूल रही मिलिशिया की 'शैडो इकोनॉमी'

Published: Thu, 08 Oct 2026 07:51 PM (IST)

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में M23 युद्ध की आड़ में स्थानीय मिलिशिया समूह हथियारों, सोने की खदानों, सड़क टोल ...और पढ़ें

M23 युद्ध की आड़ में मिलिशिया की 'शैडो इकोनॉमी' का विस्तार (फोटो-रॉयटर्स)

M23 युद्ध की आड़ में मिलिशिया की 'शैडो इकोनॉमी' का विस्तार (फोटो-रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, किंशासा। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में जारी गृहयुद्ध ने अब नया और खतरनाक रूप ले लिया है। यहां हथियारों की गूंज के पीछे सिर्फ देशभक्ति का नारा नहीं, बल्कि करोड़ों डॉलर की शैडो इकॉनोमी काम कर रही है।

रवांडा-समर्थित M23 विद्रोही समूह के साथ छिड़ी जंग की आड़ में स्थानीय मिलिशिया ने बंदूकों, सोने की खदानों, सड़क टोल और फिरौती के जरिए अपना एक विशाल वित्तीय साम्राज्य खड़ा कर लिया है।

देशभक्ति के नाम पर जबरन वसूली का खेल

दक्षिण-पूर्वी DRC के टैंगानिका प्रांत में स्थित 'म्वाला' गांव इस खौफनाक हकीकत का जीता-जागता उदाहरण है। यह इलाका प्रांतीय राजधानी कालेमी से महज 20 किलोमीटर दूर है। M23 के हमलों के बाद जब कांगो की सरकारी सेना पीछे हटी, तो उसने भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और वर्दी सड़कों पर ही छोड़ दी।

स्थानीय लड़ाकों ने इन हथियारों पर कब्जा कर लिया और खुद को वाजालेंडो (स्वाहिली में देशभक्त) घोषित कर दिया।

कागजों पर ये लड़ाके M23 के खिलाफ देश की रक्षा करने का दावा करते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई बिल्कुल अलग है। म्वाला में अब भारी हथियारों से लैस करीब 100 लड़ाके डेरा डाले हुए हैं। वे एक चीनी कंपनी द्वारा संचालित सोने की छोटी खदान को सुरक्षा देने के एवज में हर महीने 100 से 150 डॉलर वसूलते हैं।

ग्रामीणों के लिए ये देशभक्त सुरक्षा देने वाले नहीं, बल्कि खौफ का दूसरा नाम और वसूली करने वाले गुंडे बन चुके हैं।

तीर-कमान से अत्याधुनिक हथियारों तक का सफर

पूर्वी कांगो में हथियारबंद समूहों का यह रूपांतरण बेहद भयानक है। जो गांव के लड़ाके कुछ साल पहले तक पारंपरिक तीर-कमान और कुल्हाड़ियों से लड़ते थे, सेना के पीछे हटने और हथियारों की लूट के बाद अब उनके पास कोल्ड वॉर के जमाने की भारी मशीन गन और रॉकेट लॉन्चर तक आ चुके हैं।

टैंगानिका प्रांत 2013 से 2019 के बीच पिग्मी और बंटू समुदायों के बीच हुई भयानक जातीय हिंसा से उबरने की कोशिश कर रहा था। इस शांति प्रक्रिया पर पानी फेरते हुए M23 युद्ध ने इस क्षेत्र को दोबारा हथियारों का अखाड़ा बना दिया है।

निरस्त्रीकरण कार्यक्रम के प्रतिनिधियों का कहना है कि बीते एक दशक में जिस शांति को स्थापित करने में लाखों डॉलर खर्च हुए थे, वह एक झटके में ध्वस्त हो गई है। हथियारबंद मिलिशिया फिर से सक्रिय हो चुकी हैं, लेकिन इस बार उनके पास विनाशकारी आधुनिक हथियार हैं।

खदानें, रोड टोल और अपहरण

कांगो की खनिज संपदा, सोना और बैटरियों में इस्तेमाल होने वाले लिथियम, विदेश कंपनियों खासकर चीनी निवेशकों को आकर्षित करती रही हैं। मिलिशिया समूहों ने इस खनिज संपदा को अपनी कमाई का मुख्य जरिया बना लिया है।

हथियारबंद गुट सोने की खदानों को सुरक्षा देने के नाम पर मोटी रकम ऐंठते हैं। अपने नियंत्रण वाले इलाकों की सड़कों से गुजरने वाली माइनिंग कंपनियों और व्यापारियों से यह गुट हर महीने 1,500 डॉलर तक अवैध टोल वसूलते हैं। इसके अलावा ज्यादा फायदे के लिए ये लड़ाके चीनी नागरिकों और विदेशी कर्मचारियों का अपहरण कर उनसे भारी फिरौती वसूलते हैं।

इस अवैध नेटवर्क ने एक कॉन्फ्लिक्ट इकोनॉमी को जन्म दिया है, जहां इलाके पर नियंत्रण का मतलब सिर्फ सैन्य दबदबा नहीं, बल्कि संसाधनों की सीधी लूट और नकदी का प्रवाह है।

सुरक्षा पर गहरा रहा है संकट

टैंगानिका प्रांत में लिथियम का भारी भंडार है, जिसकी वैश्विक मांग इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण 2030 तक दोगुनी होने की उम्मीद है। यह संसाधन देश की तकदीर बदल सकता था, लेकिन मिलिशिया का खौफ इस आर्थिक उम्मीद पर पानी फेर रहा है। कोई भी विदेशी कंपनी ऐसे माहौल में बड़ा निवेश करने से कतराएगी जहां समानांतर सरकारें चल रही हों और कर्मचारियों की जान खतरे में हो।

सरकारी सेना अनुशासनहीनता, खराब साजो-सामान और अंदरूनी कलह के कारण इन गुटों को दबाने में नाकाम रही है। रात के समय कालेमी के बाहरी इलाकों में गोलियों की आवाजें आम हैं, जहां भगोड़े और बागी सैनिक लूटपाट और अपहरण की वारदातों को अंजाम देते हैं।

'टाइम बम' पर बैठा कांगो

नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और विश्लेषकों का मानना है कि M23 के खिलाफ जारी मुख्य लड़ाई अगर कल खत्म भी हो जाए, तो भी यह संकट खत्म नहीं होगा। युद्ध के दौरान बने आर्थिक नेटवर्क और सड़कों पर फैले आधुनिक हथियार आने वाले दशकों तक तबाही मचाते रहेंगे।

कांगो सरकार के पास इन हजारों अत्याधुनिक हथियारों को वापस ज़ब्त करने का न तो कोई ठोस ढांचा है और न ही इच्छाशक्ति।

म्वाला गांव की सोने की खदान पर कलाश्निकोव राइफलें ताने खड़े नौजवानों के लिए M23 के खिलाफ जंग भले ही देशभक्ति का एक मुखौटा हो, लेकिन हकीकत में यह बंदूक, सोने, जबरन वसूली और सत्ता के गठजोड़ पर टिका एक बेहद क्रूर और मुनाफे का कारोबार बन चुका है।