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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सीरिया में पीछे नहीं हटेगी इजरायल की सेना; उत्तरी गाजा में अपने घरों की तरफ लौटने लगे लोग

By Agency Edited By: Jeet Kumar
Published: Wed, 29 Jan 2025 02:24 AM (IST)

सीरिया में बशर अल-असद के पतन के बाद दक्षिणी सीरिया में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र पर कब्जा करने वाली ...और पढ़ें

जरायल की सेना माउंट हरमोन पर अनिश्चित काल तक तैनात रहेगी (फोटो- रॉयटर)
जरायल की सेना माउंट हरमोन पर अनिश्चित काल तक तैनात रहेगी (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. काट्स बोले- इजरायल शत्रुतापूर्ण ताकतों को दक्षिणी सीरिया में स्थापित होने की अनुमति नहीं देगा
  2. फलस्तीनी नागरिकों को उत्तरी गाजा की ओर लौटने की अनुमति मिली

 रॉयटर, यरुशलम। सीरिया में बशर अल-असद के पतन के बाद दक्षिणी सीरिया में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र पर कब्जा करने वाली इजरायल की सेना माउंट हरमोन पर अनिश्चित काल तक तैनात रहेगी। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने मंगलवार को इस इलाके के दौरे के बाद यह बात कही।

काट्स ने कहा कि इजरायल शत्रुतापूर्ण ताकतों को दक्षिणी सीरिया में स्थापित होने की अनुमति नहीं देगा। सीरिया-लेबनान सीमा पर माउंट हरमोन स्थित है, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इजरायल का गोलान हाइट्स पर भी कब्जा है, जिसे 1967 के पश्चिम एशियाई युद्ध में सीरिया से कब्जा कर लिया था।

उत्तरी गाजा में लौटने लगे लोग

युद्धविराम के तहत इजरायल की ओर से 15 महीने बाद फलस्तीनी नागरिकों को उत्तरी गाजा की ओर लौटने की अनुमति मिली। इसके बाद इस क्षेत्र में अपने घरों को लौटने के लिए लोगों का हुजूम निकल पड़ा। युद्ध के दौरान उत्तरी गाजा से लगभग 650,000 लोग विस्थापित हुए थे।

बड़ी संख्या में लोग इस इलाके में लौट आए हैं। युद्ध में बहुतों के घर तबाह हो गए हैं तो कुछ के क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस बीच, इजरायल ने अपने यहां यूएनआरडब्ल्यूए पर प्रतिबंध लगा दिया है। संयुक्त राष्ट्र की यह एजेंसी फलस्तीनियों के लिए गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में काम करती है।

लाल सागर में जहाज में लगी आग

लाल सागर में हांगकांग के झंडे वाले एएसएल बौहिनिया जहाज में मंगलवार को आग लग गई। इसके चलते चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। हालांकि अभी तक आग लगने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। यह घटना यमन के समीप हुई। इस देश के ज्यादातर हिस्से पर हाउती विद्रोहियों का नियंत्रण है।