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    'अगर ऐसा हुआ तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे...', अमेरिका के साथ समझौते पर बोले ईरान के सर्वोच्च नेता

    Updated: Fri, 19 Jun 2026 02:12 AM (IST)

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने से लेकर अन्य मुद्दों को लेकर समझौता हो गया है लेकिन इस समझौते को लेकर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी क ...और पढ़ें

    अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका के साथ समझौता स्वीकार नहीं करेंगे- मोजतबा (फोटो- रॉयटर)

    अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका के साथ समझौता स्वीकार नहीं करेंगे- मोजतबा (फोटो- रॉयटर)

    HighLights

    1. मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ट्रंप की 'बेचैनी' से हुआ ईरान समझौता

    2. मोजतबा ने कहा अगर अमेरिकी पक्ष बहुत ज्यादा मांगें रखेगा तो हम इस समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे

    डिजिटल डेस्क, तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने से लेकर अन्य मुद्दों को लेकर समझौता हो गया है लेकिन इस समझौते को लेकर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका के साथ समझौता स्वीकार नहीं करेंगे- मोजतबा

    मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष बहुत ज्यादा मांगें रखेगा तो हम इसे (समझौते को) स्वीकार नहीं करेंगे। अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन को लेकर मेरा अलग मत था, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण मैंने अनुमति दे दी।

    ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ हुए समझौते पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बेचैनी में थे और उन्होंने हर तरह का दबाव डालकर यह एमओयू करवाया।

    खामेनेई ने लिखा कि ईरानी अधिकारियों ने ईमानदारी से काम किया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति बेचैनी में थे। उन्होंने इस समझौते को करवाने के लिए हर तरह के दबाव का इस्तेमाल किया।

    खामेनेई का बयान

    उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए पूरी ईमानदारी से काम किया, लेकिन सबसे ज्यादा दबाव अमेरिकी पक्ष का ही था। खामेनेई ने लिखा कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति ही थे जिन्होंने हताशा में आकर हर तरह के दबाव का इस्तेमाल करके यह सब हासिल किया।

    उन्होंने स्वीकार किया कि समझौते को लेकर उनके मन में व्यक्तिगत रूप से कुछ आपत्तियां थीं। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक रूप से मेरी राय अलग थी और साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति द्वारा ईरानी राष्ट्र और प्रतिरोध मोर्चे के अधिकारों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता के आधार पर अपनी अनुमति दी थी।

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