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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 08, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

COP27: जलवायु परिवर्तन के गुनाहगारों को देना होगा हर्जाना, गरीब देशों ने की अमीर देशों और तेल कंपनियों से मांग

By AgencyEdited By: Mohd Faisal
Updated: Tue, 08 Nov 2022 10:58 PM (IST)

काप-27 में गरीब देशों ने अमीर देशों और तेल कंपनियों से बड़ी मांग की है। उनकी तरफ से मांग उठाई गई है कि जलवायु परिवर्तन के गुनाहगारों को हर्जाना देना होगा। साथ ही इस दौरान कार्बन टैक्स लगाने की मांग भी की गई।

COP27: जलवायु परिवर्तन के गुनाहगारों को देना होगा हर्जाना (फाइल फोटो)
COP27: जलवायु परिवर्तन के गुनाहगारों को देना होगा हर्जाना (फाइल फोटो)

शर्म अल-शेख (मिस्त्र), एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-27) में मंगलवार को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कड़ी कार्रवाई करने पर बल दिया गया। ग्लोबल वार्मिंग के लिए गरीब देशों ने धनी राष्ट्रों और तेल कंपनियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि प्रदूषकों को जलवायु परिवर्तन के लिए उन्हें हर्जाना देना होगा यानी भुगतान करना होगा। साथ ही उन्होंने ग्लोबल कार्बन टैक्स लगाने की भी मांग की।

अफ्रीकी राज्यों ने अंतरराष्ट्रीय फंड की मांग की

उन्होंने कहा कि एक तरह तेल कंपनियां और अमीर देश मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं छोटे खासकर द्वीप राष्ट्रों की हालत बेहद खराब होती जा रही है। इन राष्ट्रों ने कहा कि वे उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अफ्रीकी राज्यों ने इसके लिए और अधिक अंतरराष्ट्रीय फंड की भी मांग की।

क्या बोले बारबाडोस के प्रधानमंत्री

बारबाडोस के प्रधानमंत्री मिया मोटले जैसे नेताओं ने कहा कि यह समय जीवाश्म ईंधन कंपनियों द्वारा जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को लेकर गरीब देशों को आर्थिक योगदान करने का है। वहीं, हाल के महीनों में कार्बन मुनाफे पर अप्रत्याशित कर के विचार ने तेल और गैस की बड़ी कंपनियों के लिए उनकी भारी कमाई के बीच तनाव उत्पन्न कर दिया है, जबकि उपभोक्ताओं को रोजमर्रा के जीवन में तेल के दाम चुकाने में कमर टूटी जा रही है।

विकसित देशों को करना चाहिए मुआवजे का भुगतान

उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में ऐसा पहली बार है कि जब प्रतिनिधि विकासशील देशों की इस मांग पर चर्चा कर रहे हैं कि सबसे अमीर, सबसे प्रदूषणकारी देश पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के लिए ज्यादा जिम्मेदार हैं। इसलिए धनी और विकसित देशों को इसके लिए मुआवजे का भुगतान करना चाहिए। इसे पर्यावरणीय समझौते के रूप में ''नुकसान और क्षति'' कहा जाता है।

लंदन में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज

उधर, लंदन में भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को इंग्लैंड के सबसे व्यस्त राजमार्ग पर यातायात अवरुद्ध कर जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को समाप्त करने की मांग की।

अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ने पर मैक्रों ने की भारत की सराहना

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति की सराहना की और कहा कि भारत में इसको लेकर आगे बढ़ने की ललक है। उन्होंने कहा कि जब नवीकरणीय ऊर्जा की बात आती है तो भारत में महत्वाकांक्षा का स्तर अधिक होता है। फ्रांस, भारत, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और इंडोनेशिया नवीकरणीय ऊर्जा की ओर आगे बढ़ रहे हैं। मैक्रों ने गहरे समुद्र में खनन पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया और कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण ऊर्जा और खाद्य संकट के बावजूद जलवायु को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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