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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Shigemi Fukahori: नहीं रहे परमाणु हथियारों के खिलाफ मुहिम चलाने वाले शिगेमी फुकाहोरी; 93 साल की उम्र में हुआ निधन

By Agency Edited By: Piyush Kumar
Published: Sun, 05 Jan 2025 10:26 PM (IST)

परमाणु हथियारों के खिलाफ आवाज उठाने वाले शिगेमी फुकाहोरी का निधन हो गया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक उनकी मृत्यु ...और पढ़ें

शिगेमी फुकाहोरी ने तीन जनवरी को नागासाकी के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। (फोटो सोर्स: रॉयटर्स)
शिगेमी फुकाहोरी ने तीन जनवरी को नागासाकी के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। (फोटो सोर्स: रॉयटर्स)

HighLights

  1. 1945 के नागासाकी परमाणु बम हमले में जीवित बच गए थे
  2. समूचे विश्व में शांति के लिए समर्पित किया था अपना जीवन

एपी, टोक्यो। परमाणु हथियारों के खिलाफ मुहिम चलाने वाले शिगेमी फुकाहोरी का निधन हो गया है। वह 93 वर्ष के थे। उन्होंने तीन जनवरी को नागासाकी के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। यह जानकारी कैथोलिक चर्च ने रविवार को दी, जहां वह पिछले साल तक लगभग रोजाना प्रार्थना करते थे।

नागासाकी हमले  शिगेमी फुकाहोरी के परिवारवालों की हुई थी मौत  

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, उनकी मृत्यु वृद्धावस्था के कारण हुई। 1945 के नागासाकी परमाणु बम विस्फोट में जीवित बचने वाले फुकाहोरी ने समूचे विश्व में शांति के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था।

फुकाहोरी केवल 14 वर्ष के थे जब अमेरिका ने नौ अगस्त, 1945 को नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था। उस हमले में उनके परिवार सहित हजारों लोग मारे गए थे। यह हमला हिरोशिमा पर परमाणु हमले के तीन दिन बाद हुआ, जिसमें 140,000 लोग मारे गए थे।

फुकाहोरी को छात्रों से काफी उम्मीदें रही

जापान ने इसके कुछ दिनों बाद आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ। फुकाहोरी अक्सर छात्रों से मुखातिब हुआ करते थे और उनसे यह अपेक्षा करते थे कि वे उनकी 'शांति की पहल' को आगे बढ़ाएंगे। जब पोप फ्रांसिस ने 2019 में नागासाकी का दौरा किया तो फुकाहोरी ने ही उन्हें सफेद फूलों की माला सौंपी थी।

अगले वर्ष फुकाहोरी ने एक समारोह में परमाणु हमला पीडि़तों का प्रतिनिधित्व किया और 'शांति के लिए प्रतिज्ञा' करते हुए कहा कि अपना यह संदेश देने के लिए संकल्पित हूं कि नागासाकी ही अब वह अंतिम स्थान होगा जहां कभी परमाणु बम गिराया गया था।

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