जापान के शाही परिवार में कम हो रही योग्य उत्तराधिकारियों की संख्या, अब दूर के पुरुष रिश्तेदारों को लिया जाएगा गोद
जापान का शाही परिवार सदस्यों की घटती संख्या और उत्तराधिकार संकट का सामना कर रहा है। ...और पढ़ें

जापान का शाही परिवार
HighLights
जापान शाही परिवार में सदस्यों की संख्या घट रही है।
संसद ने पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेने का प्रस्ताव दिया।
महिला सदस्यों को शाही दर्जा बनाए रखने की अनुमति।
डिजिटल डेस्क, टोक्यो। दुनिया के सबसे पुराने शाही परिवारों में से एक जापान का शाही परिवार एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है, क्योंकि इसके योग्य सदस्यों और संभावित उत्तराधिकारियों की संख्या कम होती जा रही है। इसे देखते हुए अब, देश ने शाही परिवार के घटते सदस्यों की संख्या को फिर से बढ़ाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है।
संसद ने एक प्रस्ताव आगे बढ़ाया है, जिसके तहत शाही परिवार दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद ले सकेगा। इस योजना से जापान के कुछ अधिकारी और एक्टिविस्ट नाराज हैं। उनका कहना है कि इसका एक आसान समाधान है कि महिलाओं को सम्राट बनने की इजाजत देना।
शाही परिवार में सिर्फ 5 पुरुष
पोल के मुताबिक, आम जनता का एक बड़ा हिस्सा इस विचार का समर्थन करता है। अभी शाही परिवार में 16 सदस्य हैं, जिनमें पांच पुरुष और 11 महिलाएं शामिल हैं। सदस्यों की इतनी कम संख्या के कारण, विदेश यात्राओं और शाही समारोहों जैसे सार्वजनिक कर्तव्यों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए पर्याप्त शाही सदस्य उपलब्ध नहीं हैं। अभी सिर्फ पुरुष ही 'क्रिसेंथेमम थ्रोन' (जापान के शाही सिंहासन) पर बैठ सकते हैं। जापान के मौजूदा सम्राट नारुहितो की सिर्फ एक बेटी राजकुमारी आइको हैं।
उत्तराधिकार का संकट
साथ ही उत्तराधिकार की कतार में सिर्फ तीन लोग हैं। प्रिंस हिताची (नारुहितो के 90 साल के चाचा), क्राउन प्रिंस अकिशिनो (सम्राट के 60 साल के भाई) और प्रिंस हिसाहितो (सम्राट के 19 साल के भतीजे)। चूंकि प्रिंस हिसाहितो परिवार में बचे एकमात्र युवा पुरुष हैं, इसलिए राजशाही का भविष्य उन्हीं पर टिका है।
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शाही परिवार की महिलाओं को न सिर्फ राजा बनने का अधिकार नहीं है, बल्कि किसी आम नागरिक से शादी करने पर उनका शाही दर्जा भी छिन जाता है। यही नियम राजकुमारी आइको पर भी लागू होता है।
विचाराधीन नए कानून के तहत शाही परिवार पुरुष उत्तराधिकारियों को गोद ले सकेगा। साथ ही, परिवार की महिला सदस्य शाही दायरे में बनी रह सकेंगी और परिवार से बाहर शादी करने के बाद भी अपने शाही खिताब अपने पास रख सकेंगी।