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लैब से निकलकर युद्ध के मैदान में उतरेंगे 'ह्यूमनॉइड रोबोट', चीनी सेना का मिशन किलर तैयार

Published: Tue, 08 Sep 2026 09:13 PM (IST)

चीनी सेना युद्ध के मैदान में इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट (ह्यूमनॉइड्स) उतारने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए ...और पढ़ें

रोबोट युद्ध के मैदान में उतारने की तैयारी (AI फोटो)

रोबोट युद्ध के मैदान में उतारने की तैयारी (AI फोटो)

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डिजिटल डेस्क, बीजिंग। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट्स (ह्यूमनॉइड्स) को युद्ध के मैदान में उतारने की बड़ी तैयारी कर रही है।

हाल ही में चीन में आयोजित वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स के बाद, चीनी सेना के आधिकारिक समाचार पत्र PLA डेली ने वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स से कहा है कि वे रोबोटिक लड़ाकों के लिए अत्याधुनिक तकनीकों के विकास में तेजी लाएं।

रिसर्च, खरीद और लैब से मिलिट्री ग्राउंड का सफर

रॉयटर्स द्वारा चीनी सैन्य खरीद नोटिस, अकादमिक अध्ययन और पेटेंट की समीक्षा से पता चलता है कि चीन का डिफेंस सिस्टम ह्यूमनॉइड रोबोट्स के सैन्य इस्तेमाल पर गहन शोध कर रहा है। वर्ष 2025 और 2026 में इस काम ने काफी तेजी पकड़ी है।

सेना अब रोबोट की समझने की क्षमता, सामान संभालने और डेटा ट्रेनिंग पर ध्यान दे रही है। जून 2026 में PLA ने रोबोट्स के लिए कैमरा, रडार और मोशन डेटा संग्रह करने वाले सिस्टम के लिए भारी बजट तय किया।

BofA ग्लोबल रिसर्च के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में ह्यूमनॉइड रोबोट उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत थी, जिससे सेना को एक विशाल व्यावसायिक आधार मिल रहा है।

शहरी युद्ध और कॉम्बैट मिशन

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) के शोधकर्ताओं के एक मॉडल के अनुसार, भविष्य के शहरी युद्ध में छह कॉम्बैट रोबोट्स इंसानी सैनिकों के साथ मिलकर दुश्मन के कब्जे वाली इमारतों को एक-एक कमरा करके खाली कराएंगे।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि दो हाथ और दो पैरों की बदौलत ये रोबोट सुरंगों, इमारतों और जहाजों के अंदर चढ़ने और चीजों को संभालने में बेहद कारगर हो सकते हैं।

इसके अलावा, PLA की सरकारी डिफेंस कंपनी नोरिन्को ने फुक्सी नाम का फुल-साइज ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित किया है, जिसे दूर बैठे ऑपरेटर द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है।

अमेरिका से होड़ और मुकाबला

सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि अमेरिका भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। अमेरिकी सेना ने भी मिलिटराइज् ह्यूमनॉइड क्षमताएं विकसित करने के लिए प्रतियोगिता शुरू की है ताकि भविष्य में सैनिकों के साथ खतरनाक अभियानों, सुरक्षा गश्त और शहरी हमलों में रोबोट्स को तैनात किया जा सके।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दो पैरों और चार पैरों वाले रोबोट बनाने के मामले में अमेरिका का रोबोटिक्स उद्योग फिलहाल चीन से पीछे है।

मशीनों की अविश्वसनीयता

अत्यधिक ऊर्जा खपत, युद्धक्षेत्र का अनिश्चित माहौल और मशीनों की अविश्वसनीयता अभी भी सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। UCLA के प्रोफेसर डेनिस होंग के अनुसार, जहां इंसानों की जान को खतरा हो, वहां रोबोट्स को खोना एक बेहतर विकल्प है।

लेकिन स्वायत्त हथियारों से नैतिक दुविधाएं भी पैदा होती हैं। इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि ये रोबोट युद्ध के नियमों के तहत आत्मसमर्पण करने वाले या घायल सैनिकों के संकेतों को सही ढंग से समझने में असमर्थ हो सकते हैं।

इन तमाम चिंताओं के बावजूद, चीनी रक्षा विशेषज्ञ वांग योंगहुआ का मानना है कि तकनीकी प्रगति और कम लागत के साथ आने वाले समय में ये रोबोट भारी संख्या में युद्ध के मैदान में उतरेंगे।

(न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)