विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सुपर-डुपर अल नीनो का खतरनाक रूप, नक्शे में लाल रंग में आधी से ज्यादा पृथ्वी; WMO ने जारी की चेतावनी

Published: Thu, 08 Oct 2026 03:56 PM (IST)

दुनिया भर के मौसम विशेषज्ञ 'सुपर-डूपर अल नीनो' की चेतावनी दे रहे हैं, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1950 के बाद का सबसे मजबूत घटनाक्रम बताया है।

वैज्ञानिकों ने इसे 'सुपर-डूपर अल नीनो' कहा, 2027 तक रहेगा। (फोटो- AI जेनरेटेड)

वैज्ञानिकों ने इसे 'सुपर-डूपर अल नीनो' कहा, 2027 तक रहेगा। (फोटो- AI जेनरेटेड)

HighLights

  1. संयुक्त राष्ट्र ने 1950 के बाद सबसे मजबूत अल नीनो की चेतावनी दी।

  2. वैज्ञानिकों ने इसे 'सुपर-डूपर अल नीनो' कहा, 2027 तक रहेगा।

  3. 4.5 लाख से अधिक मौतों का अनुमान, वैश्विक तापमान में वृद्धि होगी।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। दुनिया भर के मौसम विशेषज्ञ अल नीनो के बारे में चेतावनी दे रहे है और इसके ऐसी स्थिति में पहुंचने का दावा कर रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखी गई।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस साल के मौसम का घटनाक्रम साल 1950 के बाद से देखे गए सबसे मजबूत घटनाक्रमों में से एक हो सकता है।

सुपर-डूपर अल नीनो: क्या है वैज्ञानिकों का मत

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर में भारी मात्रा में जमा हुई गर्मी के बाहर निकलने के कारण आने वाले महीनों में पृथ्वी का एक बड़ा हिस्सा असामान्य रूप से गर्म रहेगा।

मौसम वैज्ञानिक रयान माउ ने पूरी पृथ्वी का एक जलवायु नक्शा पोस्ट किया और कहा कि पृथ्वी लगभग पूरी तरह से लाल रंग में दिख रही है। वैज्ञानिक ने x पर कहा, 'अल नीनो सर्दियों में भी अपनी पूरी ताकत के साथ बना रहेगा और अमेरिका को छोड़कर हर जगह पृथ्वी का तापमान बढ़ेगा।'

वैज्ञानिक ने WMO के इस अनुमान से सहमति जताई है कि अल नीनो फरवरी 2027 तक बना रहेगा।

एक और वैज्ञानिक जेक हॉसफादर ने सोशल साइट X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'इस साल का अल नीनो ऐसी स्थिति में पहुंच रहा है जो पहले कभी नहीं देखी गई है। अल नीनो के मुख्य केंद्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो चुका है, जो अब तक के रिकॉर्ड में दर्ज किसी भी अल नीनो से ज्यादा है।'

प्रसिद्ध मौसम विशेषज्ञ लियोन साइमन्स ने मौसम की इस स्थिति को सुपर-डूपर अल नीनो करार दिया है।

क्या होता है अल नीनो और क्यों है खतरनाक?

अल नीनो प्राकृतिक रूप से होने वाले अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन चक्र का गर्म चरण है, यह एक ऐसा जलवायु पैटर्न है जो दुनियाभर के मौसम को प्रभावित करता है।

अल नीनो के कारण आमतौर पर वैश्विक तापमान बढ़ता है और बड़े क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न बिगड़ जाता है यानी कुछ इलाकों में सूखा पड़ता है तो कुछ में भारी बारिश होती है और यह आमतौर पर हर दो से सात साल में होता है।

शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के रिसर्चर्स ने पिछले महीने अनुमान लगाया था कि इस साल के सुपर अल नीनो के कारण जून से फरवरी 2027 के बीच दुनिया भर में 4 लाख 51 हजार से ज्यादा मौतें हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें- कभी बारिश तो कभी धूप... मौसम के बदलते मिजाज के बीच मां वैष्णो देवी यात्रा जारी; नवरात्रों को लेकर खास तैयारी