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    अमेरिका में H-1B और L-1 वीजा एक्सटेंशन होगा महंगा, भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा असर

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 10:04 PM (GMT+05:30)

    अमेरिका में H-1B और L-1 वीजा के विस्तार पर अब शुल्क लगेगा, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों पर असर पड़ेगा। ...और पढ़ें

    अमेरिका में H-1B और L-1 वीजा एक्सटेंशन होगा महंगा।

    अमेरिका में H-1B और L-1 वीजा एक्सटेंशन होगा महंगा।

    HighLights

    1. H-1B, L-1 वीजा विस्तार पर अब लगेगा शुल्क।

    2. भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों पर पड़ेगा सीधा असर।

    3. 9 सितंबर से लागू होगा नया नियम, बढ़ेगा खर्च।

    डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यूरिटी ने नियोक्ताओं की ओर से दाखिल किए जाने वाले वीजा अवधि के विस्तार के आवेदनों पर भी शुल्क का विस्तार कर दिया है। भले ही कर्मचारी उसी कंपनी में बने रहें।

    एच-1बी आवेदनों पर यह शुल्क 4000 डॉलर और एल-1 आवेदनों पर यह 4500 डॉलर है। नौ सितंबर से लागू होने वाले इस नियम से विदेशी प्रतिभाओं पर बहुत अधिक निर्भर व्यवसायों के लिए बार-बार होने वाले आव्रजन खर्च में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    यह नियम खास तौर पर उन कंपनियों पर लागू होगा जो अमेरिका में कम से कम 50 कर्मचारियों को रोजगार देती हैं और जहां 50 प्रतिशत से अधिक घरेलू कर्मचारियों के पास सामूहिक रूप से एच-1बी, एल-1ए या एल-1बी का दर्जा है। संशोधित नियम के तहत, ऐसी कंपनियों को हर बार किसी कर्मचारी का प्रवास बढ़ाने का आवेदन करते समय '9/11 रिस्पॉन्स और बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट फीस' जमा करनी होगी।

    पहले यह शुल्क आम तौर पर शुरुआती रोजगार या नियोक्ता बदलने से जुड़े आवेदनों तक ही सीमित था। नियोक्ता को पहले से काम कर रहे कर्मचारी के लिए वीजा विस्तार शुल्क से छूट हासिल थी, बशर्ते अलग से धोखाधड़ी-रोकथाम फीस (फ्रॉड-प्रिवेंशन फीस) लागू न हो।

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    डीएचएस का कहना है, "नियमों में बदलाव डीएचएस की कानूनी भाषा की व्याख्या को सही करते हैं, ताकि इसके दायरे में आने वाले नियोक्ताओं को दर्जा विस्तार के सभी आवेदनों के लिए '9/11 बायोमेट्रिक फीस' जमा करनी पड़े, चाहे संबंधित फ्रॉड-प्रिवेंशन एंड डिटेक्शन फीस फीस लागू हो या नहीं।"

    हालांकि शुल्क की असल दरें वही हैं, लेकिन इस बदलाव से उन आवेदनों की संख्या काफी बढ़ गई है जिन पर ये मौजूदा शुल्क लागू होंगे।

    प्रभावित नियोक्ताओं को हर पात्र एच-1बी आवेदन के लिए 4000 डॉलर और हर एल-1 आवेदन के लिए 4500 डॉलर का खर्च उठाना होगा। संशोधित आवेदन जिनमें कर्मचारी के अधिकृत दर्जे की अवधि बढ़ाने का अनुरोध नहीं किया गया है, उन्हें छूट मिलती रहेगी।

    इस संबंध में वित्तीय जिम्मेदारी पूरी तरह से नियोक्ता पर है; डीएचएस ने उन प्रस्तावों को खारिज कर दिया है जिनके तहत विदेशी पेशेवर खुद यह शुल्क दे सकते थे, अगर उनकी कंपनियां भुगतान करने को तैयार न हों।

    सरकारी दस्तावेजों में माना गया है कि अगर कंपनियां बार-बार वीजा विस्तार से जुड़े खर्चों पर दोबारा विचार करती हैं, तो भारतीय प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और कुशल पेशेवरों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

    (समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)