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नाटो समिट के दौरान ईरान को पता थी ट्रंप की लोकेशन, हमले से बचाने के लिए एजेंसियों ने चली चाल; रिपोर्ट में खुलासा

Updated: Wed, 12 Aug 2026 06:38 PM (IST)

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सही लोकेशन का पता था और उनके विमान पर मिसाइल हमले का खतरा था।

नाटो समिट के दौरान ईरान को पता थी ट्रंप की लोकेशन।

नाटो समिट के दौरान ईरान को पता थी ट्रंप की लोकेशन।

HighLights

  1. ईरान को नाटो समिट में ट्रंप की लोकेशन पता थी।

  2. मिसाइल हमले के खतरे के कारण सुरक्षा चाल चली गई।

  3. ट्रंप को कैटरिंग कंटेनर से दूसरे विमान में ले जाया गया।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को लेकर अमेरिका को ऐसी जानकारी मिलीं हैं, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों को कई ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनसे पता चलता है कि ईरान को नाटो समिट के दौरान अंकारा में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सही लोकेशन का पता था और उनके विमान को निशाना बनाने में सक्षम मिसाइल से संभावित खतरा था।

ईरान को थी ट्रंप की सही लोकेशन की जानकारी

दो अमेरिकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि अधिकारियों ने ट्रंप को ले जा रहे विमान पर 'सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल' से हमले के खतरे को भांप लिया था।

खबर है कि नाटो समिट के पास किसी को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था, जबकि ईरानी ऑपरेटिब्स को यह भी पता था कि ट्रंप अपने होटल की किस मंजिल पर ठहरे हुए थे।

कैटरिंग कंटेनर से ट्रंप को एयरपोर्ट के बाहर लाया गया

इस खुफिया जानकारी को इतना गंभीर माना गया कि सुरक्षा के लिए एक धोखा देने वाली चाल चलनी पड़ी। ट्रंप सबसे सामने पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार हुए, लेकिन फिर उन्हें चुपके से एयरपोर्ट से बाहर एक कैटरिंग कंटेनर में ले जाया गया और एक मिलिट्री विमान में बैठाया गया, जिससे वे तुर्किए से बाहर निकले।

उस समय व्हाइट हाउस ने बताया था कि ट्रंप तुर्किए से ब्रिटेन के लिए एयर फोर्स वन में रवाना हुए हैं। लेकिन द पोस्ट के मुताबिक, ट्रंप के विमान में सवार होने के कुछ ही देर बाद उन्हें कैटरिंग ट्रक के जरिये एयरपोर्ट के एक हिस्से से बाहर निकाला गया और अमेरिकी वायुसेना के सी-32ए विमान में बैठाया गया। न्यूयार्क टाइम्स भी इससे मिलती-जुलती रिपोर्ट पहले प्रकाशित कर चुका है।

नए विमान को लेकर भी उठे सवाल

ट्रंप नाटो सम्मेलन में शामिल होने के लिए कतर से मिले नए और अपग्रेड किए गए विमान से अंकारा पहुंचे थे। यह विमान उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा में इस्तेमाल हुआ था। हालांकि, तुर्किए से रवाना होते समय ट्रंप ने अचानक पुराने एयर फोर्स वन से ब्रिटेन जाने का फैसला किया।

उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर इसे 'पुरानी यादों' से जोड़ा और कहा कि नया विमान ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहाल बेस पर ही रहेगा, ताकि वहां मौजूद अमेरिकी सैनिक उसे देख सकें।

पत्रकारों को भी भ्रम में खा गया 

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अंकारा एयरपोर्ट पर कैमरों के सामने ट्रंप पुराने एयर फोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें कैटरिंग ट्रक से सी-32ए तक ले जाया गया। इस पूरे अभियान का मकसद उनकी वास्तविक यात्रा को छिपाकर सुरक्षा खतरे को कम करना था।

ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को लगा कि वे राष्ट्रपति के साथ उसी पुराने एयर फोर्स वन में यात्रा कर रहे हैं। उन्हें विमान की खिड़कियों के शेड बंद रखने के लिए कहा गया था। बाद में पत्रकारों ने ट्रंप से इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि शायद वे 'खतरनाक उड़ान' पर थे।

ब्रिटेन पहुंचने के बाद भी बना रहा रहस्य

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को लेकर सी-32ए विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन पहुंचा। कुछ मिनट बाद पुराना एयर फोर्स वन और मीडिया दल भी वहां पहुंच गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप को सी-32ए से पुराने एयर फोर्स वन में किस तरह स्थानांतरित किया गया।

ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के अनुसार, वे रात करीब 10:56 बजे पुराने एयर फोर्स वन से नीचे उतरे। उन्होंने पत्रकारों की ओर शांति का संकेत किया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं की। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों का अभिवादन किया और एयर फोर्स वन से वाशिंगटन तक की बाकी यात्रा पूरी की।

बता दें कि इससे पहले साल 2000 में तत्कालीनी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत से पाकिस्तान की यात्रा के दौरान विमान बदला गया था। उस दौरान उन्हें गल्फस्ट्रीम विमान से पाकिस्तान ले जाया गया था।

(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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