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    सीनेट के सहारे रूस को सजा देना चाहते हैं ट्रंप, भारत-चीन को चुकानी पड़ सकती है कीमत

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 12:02 AM (IST)

    अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है, जिससे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पां ...और पढ़ें

    ट्रंप ने सीनेट के कंधे पर रखकर रूस को सजा देने का नया तरीका निकाला (फोटो- रॉयटर)

    ट्रंप ने सीनेट के कंधे पर रखकर रूस को सजा देने का नया तरीका निकाला (फोटो- रॉयटर)

    HighLights

    1. ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया था

    2. अमेरिकी सीनेट ने लिंडसे ग्राहम विधेयक पारित कर दिया है

    डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है, जिससे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों (भारत, चीन और तुर्की सहित) पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

    यह विधेयक 86-11 के भारी बहुमत से पास हुआ। इसे लिंडसे ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध अधिनियम 2026 नाम दिया गया है। यह स्वर्गीय रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर है, जो यूक्रेन के कट्टर समर्थक थे और 11 जुलाई को उनका निधन हो गया था। अब यह विधेयक हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा।

    विधेयक में रूस की ऊर्जा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों, रूसी बैंकों, अधिकारियों, तथाकथित कुलीन वर्ग और छाया टैंकर बेड़े को भी निशाना बनाया गया है।

    ट्रंप ने भारत पर कम कर दिया था टैरिफ

    अगस्त 2025 में ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिससे कई भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंच गया था।

    फरवरी 2026 में भारत के रूसी तेल खरीदना बंद करने के समझौते के बाद वह अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया गया था और पारस्परिक टैरिफ 18 फीसदी कर दिया गया। अब फिर से ऐसा कानूनी प्रविधान आने से सवाल उठ रहा है कि जब भारत पहले ही पुरस्कृत हो चुका है, तो फिर धमकी का नया बटन क्यों दिया जा रहा है।

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    टैरिफ का असली असर

    100 फीसदी टैरिफ का मतलब यह नहीं कि सारा व्यापार बंद हो जाएगा। राष्ट्रपति को छूट देने का अधिकार होगा और राष्ट्रीय हित में छूट के प्रावधान भी हैं। सहयोगी देश रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के कदम उठाकर छूट पा सकते हैं।

    भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा है। रूसी तेल उसकी आपूर्ति का अहम हिस्सा बन चुका है। मार्च-मई में अकेले भारत ने रुपये में लगभग 14.6 अरब डॉलर के आयात का निपटान किया, जिसमें रूसी तेल की बड़ी भूमिका रही।