पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पर दिख रहा सत्ता बदलने का असर, बैनरों से गायब हुए कई पुराने राजनीतिक चेहरे
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर दुर्गा पूजा समितियों पर दिख रहा है, जहां पुराने राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम बैनरों से गायब हो रहे हैं।

HighLights
बंगाल दुर्गा पूजा समितियों पर सत्ता परिवर्तन का असर।
पुराने राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम बैनरों से हुए गायब।
नए नेताओं को मिली प्रमुख जिम्मेदारी, समीकरण बदले।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर दुर्गापूजा की आयोजक समितियों पर भी दिखने लगा है। कोलकाता से सटे उत्तर उपनगरों में कई पूजा समितियों के प्रचार बैनरों से पुराने राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम गायब हो गए हैं।
कहीं नए नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है, तो कहीं पुराने नेता पर्दे के पीछे से आयोजन से जुड़े हैं। बरानगर, पानीहाटी और कामारहाटी में इस बार पूजा समितियों के नेतृत्व और संरक्षक की भूमिका में बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है।
भाजपा विधायक को बनाया गया मुख्य संरक्षक
बरानगर की नेताजी कालोनी लोलैंड पूजा में पिछले कई वर्षों से प्रमुख आयोजक की भूमिका निभा रहे उपनगर प्रमुख दिलीप नारायण बसु अब सह-सभापति हैं। इस बार भाजपा विधायक सजल घोष को पूजा का मुख्य संरक्षक बनाया गया है। पहले पूजा के आयोजन को लेकर राजनीतिक दल के दो नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा की चर्चा रहती थी, लेकिन इस बार पुराने समीकरण बदल गए हैं।
छोटी पूजा समितियों में भी दिख रहा बदलाव
कोलकाता के सिंथी सर्कस मैदान में बंदुदल स्पोर्टिंग की पूजा में भी बदलाव हुआ है। पहले पूर्व पार्षद बासव घोष का प्रभाव था, लेकिन इस बार मुख्य संरक्षक की जिम्मेदारी विधायक सजल घोष के पास है। स्थानीय लोगों ने चुनाव प्रचार के दौरान संतोष मित्र स्क्वायर जैसी बड़ी पूजा आयोजित करने की मांग की थी। इसके बाद यहां कमल मंदिर की तर्ज पर मंडप तैयार किया गया है।
बरानगर की अन्य छोटी और मध्यम पूजा समितियों में भी नेतृत्व की भूमिकाओं में बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, सजल घोष का कहना है कि पूजा का राजनीति से कोई संबंध नहीं है और विधायक के तौर पर वह करीब 150 पूजा समितियों के मुख्य संरक्षक बने हैं।
पानीहाटी और कामारहाटी में भी बदला समीकरण
पानीहाटी में भी पूजा समितियों के बैनरों से पूर्व विधायक निर्मल घोष का नाम हट गया है। उनकी जगह भाजपा के जिला अध्यक्ष चंडीचरण राय और महासचिव जय साहा को प्रमुखता मिली है। कामारहाटी में तृणमूल कांग्रेस विधायक मदन मित्रा इस बार पूजा समितियों के बैनरों पर नजर नहीं आ रहे हैं।
दूसरे को जिम्मेदारी देने का अनुरोध
पिछले वर्षों में बीटी रोड के किनारे कई पूजा समितियों के बैनरों पर अध्यक्ष के रूप में उनका नाम रहता था। मदन मित्रा ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं समितियों से अपना नाम हटाकर किसी दूसरे को जिम्मेदारी देने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि अध्यक्ष के रूप में नाम रहने से कोई राजनीतिक विवाद नहीं हो, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया।
