दुर्गापूजा के अनुदान में बदलाव की तैयारी, 10 लाख रुपये से कम बजट वाली पूजा समितियों को ही मदद देने पर विचार
पश्चिम बंगाल सरकार दुर्गापूजा अनुदान नीति में बदलाव की तैयारी कर रही है, जिसमें 10 लाख से कम बजट वाली पूजा समितियों को ही वित्तीय सहायता देने पर विचार ...और पढ़ें

HighLights
नई सरकार 10 लाख से कम बजट वाली पूजा समितियों को देगी सहायता।
मुख्यमंत्री ने पूजा आयोजकों से मिलकर अनुदान नीति पर की चर्चा।
छोटी पूजा समितियों में सरकारी सहायता मिलने की बढ़ी उम्मीद।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार दुर्गापूजा है। मई में नई सरकार बनने के बाद यह पहला शारदोत्सव होगा। ऐसे में दुर्गापूजा के सरकारी अनुदान को लेकर नई नीति की तैयारी शुरू हो गई है।
राज्य सचिवालय नवान्न सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार 10 लाख रुपये से कम बजट वाली पूजा समितियों को ही आर्थिक सहायता देने के विकल्प पर विचार कर रही है।
हालांकि, अंतिम निर्णय लेने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी वित्त विभाग के साथ चर्चा कर सकते हैं। पिछली सरकार में सभी पुलिस-अनुमोदित पूजा समितियों को 1.10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता था। नई सरकार ने अब सभी पूजा समितियों को समान रूप से अनुदान देने की नीति से हटकर जरूरतमंद समितियों को चुनकर सहायता देने की बात कही है।
पूजा आयोजकों से मुख्यमंत्री की बैठक के बाद बढ़ी उम्मीद
बुधवार को नवान्न में मुख्यमंत्री ने कोलकाता की दुर्गापूजा समितियों के संयुक्त संगठन फोरम फार दुर्गोत्सव के दो पदाधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में बालीगंज कल्चरल के अंजन उकिल और बेहाला नूतन दल के संदीपन बनर्जी ने कोलकाता के शारदोत्सव से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री इंद्रनील खां भी मौजूद थे।
बैठक के बाद अंजन उकिल ने फोरम के वाट्सऐप ग्रुप में संदेश भेजकर बताया कि बड़ी सड़कों और गलियों में होने वाली पूजा, बिजली में छूट, होर्डिंग-बैनर पर निगम कर में राहत और पूजा अनुदान समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों से चर्चा कर इसी महीने एक बैठक के माध्यम से फैसले की जानकारी देने की बात कही है।
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यह संदेश कोलकाता की विभिन्न पूजा समितियों तक पहुंचने के बाद खासकर छोटी समितियों में उम्मीद बढ़ी है। कई छोटी समितियां सरकारी रुख स्पष्ट नहीं होने के कारण अभी अपना अंतिम बजट तय नहीं कर पाई हैं। खर्च कम करने के लिए कुछ समितियों ने थीम तक बदल दी है और कुछ जगह थीम कलाकार भी बदले गए हैं।