बंगाल में सरकारी कर्मचारियों की बढ़ेगी सैलरी, 7वें वेतन आयोग में शामिल किए गए कई नए नियम
बंगाल सरकार ने सातवें राज्य वेतन आयोग के लिए विस्तृत नियम व कार्यक्षेत्र तय करते हुए अधिसूचना जारी की है। ...और पढ़ें
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बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के नए नियम जारी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता : बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए हाल में गठित सातवें राज्य वेतन आयोग के लिए विस्तृत नियम शर्तें एवं कार्यक्षेत्र तय करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है।
इसमें वेतन संरचना, वार्षिक वेतनवृद्धि, केंद्रीय वेतनमान के अनुरूप वेतन स्तर, महंगाई भत्ता, आवास भत्ता, सेवानिवृत्ति लाभ और विभिन्न भत्तों की समीक्षा का प्रावधान किया गया है।
नए नियम और शर्तें शामिल
केंद्रीय कर्मचारियों के साथ वेतन समानता, 11 साल बाद रूपांतरित पेंशन की बहाली और वार्षिक वेतन वृद्धि को तीन से बढ़ाकर कम से कम पांच प्रतिशत करना बंगाल के सातवें वेतन आयोग के नियमों और शर्तों में शामिल हैं।
यानी फिलहाल तीन प्रतिशत की वार्षिक वेतनवृद्धि के स्थान पर आयोग अब कम से कम पांच प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि किए जाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा। म
आयोग कर रहा विचार
महंगाई और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए वेतन मैट्रिक्स की समीक्षा भी की जाएगी। हाल में गठित यह आयोग राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में व्यापक संशोधन तथा करियर प्रगति, सेवानिवृत्ति और स्वास्थ्य देखभाल लाभों में बदलाव का प्रस्ताव करने पर विचार कर रहा है।
राज्य की नई भाजपा सरकार ने आयोग को मौजूदा वेतन ढांचे, भत्तों, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की समीक्षा कर उन्हें मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों तथा महंगाई के अनुरूप तर्कसंगत बनाने तथा इसपर अपनी सिफारिश देने का दायित्व सौंपा है।
व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करना मकसद
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावों का मकसद सेवा शर्तों के सभी प्रमुख पहलुओं को इसमें शामिल करते हुए मौजूदा व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करना है।
सातवें वेतन आयोग के कार्य-दायरे में राज्य सरकार के कर्मचारियों और केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के वेतन स्तर में समानता लाना, पूरे देश में एक जैसा स्तर हासिल करना और वेतन ढांचे में अंतर के कारण होने वाले कानूनी विवादों को कम करना शामिल है।
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प्रस्तावित शर्तों में औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर महंगाई भत्ता तय करने की व्यवस्था शुरू करने और इसके भुगतान के लिए एक स्थाई आदेश की सिफारिश करने की भी बात कही गई है।
आयोग से कहा गया है कि वह एक जनवरी, 2026 से संशोधित वेतन ढांचे को केवल कागजी तौर पर नहीं, बल्कि असल में लागू करने पर विचार करे।