आईआईटी खड़गपुर ने बनाया 'क्लाईमेड मॉडल', डेंगू के जोखिम का करेगा सटीक आकलन
आईआईटी-खड़गपुर ने डेंगू की रोकथाम के लिए 'क्लाईमेड' नामक एक जलवायु-आधारित मॉडल विकसित किया है। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। डेंगू की रोकथाम और समय रहते तैयारी को मजबूत करने की दिशा में आईआईटी-खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने 'क्लाईमेड' नामक जलवायु आधारित मॉडल विकसित किया है। यह फ्रेमवर्क भारत में डेंगू संक्रमण के जोखिम का आकलन करने के लिए मौसम, पर्यावरण और जैविक कारकों का एक साथ विश्लेषण करता है, जिससे संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों की पहले से पहचान की जा सके।
आईआईटी-खड़गपुर ने 'क्लाईमेड' डेंगू जोखिम मॉडल बनाया
आईआईटी-खड़गपुर के सेंटर फार ओशन, रिवर, एटमास्फियर एंड लैंड साइंसेज (कोरल) के प्रोफेसर एएनवी सत्यनारायण ने बताया कि डेंगू का खतरा केवल मौसम पर निर्भर नहीं करता, बल्कि तापमान, वर्षा, आर्द्रता, भूमि उपयोग, बस्तियों के स्वरूप, जनसंख्या घनत्व और मच्छरों की उपयुक्तता जैसे कई कारक मिलकर इसे प्रभावित करते हैं। 'क्लाईमेड' इन सभी पहलुओं का एकीकृत विश्लेषण करता है।
उन्होंने बताया कि तापमान मच्छरों के काटने की दर, उनके विकास, जीवित रहने और वायरस के संक्रामक बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। वहीं वर्षा प्रजनन स्थल तैयार करती है, जबकि अत्यधिक बारिश लार्वा को नुकसान भी पहुंचा सकती है। आर्द्रता मच्छरों की सक्रियता और जीवनकाल को प्रभावित करती है।
डेंगू फैलाने वाली प्रजातियों के व्यवहार पर रखता है ध्यान
यह मॉडल डेंगू फैलाने वाली दो प्रमुख प्रजातियों एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस के व्यवहार को भी ध्यान में रखता है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों और मौसम के अनुसार संक्रमण के जोखिम का अधिक सटीक आकलन किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार 'क्लाईमेड' का उद्देश्य डेंगू मामलों के आधिकारिक आंकड़ों का विकल्प बनना नहीं, बल्कि उन्हें पूरक जानकारी उपलब्ध कराना है।
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कई बार संक्रमण के मामले दर्ज होने या जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है। ऐसे में यह मॉडल उन दिनों और क्षेत्रों की पहचान कर सकता है, जहां जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियां संक्रमण के अनुकूल बन रही हों।
यह फ्रेमवर्क राष्ट्रीय, राज्य, जिला, शैक्षणिक परिसर या किसी विशेष अध्ययन क्षेत्र के स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे निगरानी, मच्छर नियंत्रण अभियान और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।