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आधार-पैन फिर भी बांग्लादेशी कैसे? कलकत्ता हाई कोर्ट ने कार्रवाई पर उठाए सवाल, निर्वासन के आदेश पर लगाई रोक

Published: Thu, 08 Oct 2026 11:20 PM (IST)Updated: Thu, 08 Oct 2026 11:21 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने आधार, पैन और वोटर आईडी जैसे भारतीय दस्तावेज होने के बावजूद एक व्यक्ति को बांग्लादेशी घोषित ...और पढ़ें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने भारतीय दस्तावेजों पर बांग्लादेशी घोषित करने पर सवाल उठाए।

  2. अदालत ने निर्वासन आदेश पर रोक लगाई, नागरिकता निर्धारण पर जोर दिया।

  3. राज्य सरकार से 1970-79 के प्रवासियों पर भी सवाल पूछे गए।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में करीब दो महीने से होल्डिंग सेंटर में बंद उत्तर 24 परगना के एक व्यक्ति के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को बंगाल सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पूछा कि जब संबंधित व्यक्ति के पास आधार, पैन और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज मौजूद हैं तो उन्हें रद किए बिना किस आधार पर बांग्लादेशी घोषित कर दिया गया?

अदालत ने यह भी सवाल किया कि केवल परिवार के कथित सदस्यों द्वारा पहचानने से इनकार कर देने से किसी व्यक्ति की नागरिकता कैसे तय हो सकती है।

याचिकाकर्ता साहिदुल शेख को आठ अगस्त को मुर्शिदाबाद के रानीनगर थाने की पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी होने के संदेह में गिरफ्तार किया था। 10 अगस्त को उसे होल्डिंग सेंटर भेज दिया गया। बाद में एफआरआरओ के आदेश के आधार पर उसके निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हुई।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने राज्य से पूछा कि 1970-79 के बीच भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर कितने लोग भारत आए थे और क्या उन सभी को वापस भेजना व्यावहारिक रूप से संभव है। उन्होंने सीमा से लगे जिलों की जमीनी स्थिति को समझने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया।

राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार, पैन या मतदाता पहचान पत्र हासिल किया  गया हो तो यह निर्वासन का आधार बन सकता है।

राज्य ने यह भी कहा कि केंद्र के दो मई 2026 के दिशा-निर्देशों के तहत अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया चल रही है। अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि निर्वासन से पहले संबंधित व्यक्ति की नागरिकता तय करने के लिए सभी प्रासंगिक दस्तावेजों और तथ्यों पर विधिसम्मत तरीके से विचार जरूरी है।

कोर्ट ने फिलहाल निर्वासन आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को उचित अधिकार क्षेत्र वाली पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।