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    बंगाल में औद्योगिक पुनरुत्थान की तैयारी, सिंगुर में टाटा की वापसी पर जोर

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 10:25 PM (IST)

    बंगाल सरकार 15 साल के औद्योगिक सूखे को खत्म कर राज्य को फिर से उद्योग के नक्शे पर लाने की तैयारी कर रही है। ...और पढ़ें

    निवेश का रोडमैप तैयार कर रही बंगाल सरकार। (पीटीआई)

    निवेश का रोडमैप तैयार कर रही बंगाल सरकार। (पीटीआई)

    HighLights

    1. बंगाल सरकार 15 साल बाद औद्योगिक सूखा खत्म करने को तैयार।

    2. सिंगुर में टाटा समूह को वापस लाने के प्रयास जारी हैं।

    3. नई औद्योगिक नीति और निवेश का रोडमैप तैयार किया जा रहा।

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई भाजपा सरकार ने 15 वर्षों से चले आ रहे औद्योगिक सूखे को खत्म कर राज्य को फिर से उद्योग के नक्शे पर लाने की तैयारी तेज कर दी है।

    राज्य के उद्योग व वाणिज्य मंत्री तापस रॉय ने रविवार को राज्य सचिवालय नवान्न में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग आएंगे और सिंगुर में भी दोबारा औद्योगिक गतिविधियां शुरू होंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति व निवेश का रोडमैप तैयार कर रही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि सिंगुर समेत राज्य में उद्योग लाना इतना आसान नहीं है।

    पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए रॉय ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक के उसके शासनकाल में पैदा हुई जमीन, नीति और निवेश से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में कुछ समय लगेगा।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार टाटा समूह के संपर्क में है और उसे फिर से बंगाल में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार केवल वाहन उद्योग ही नहीं, बल्कि टाटा समूह के दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं भी तलाश की जाएंगी।

    ‘सिंगुर में न उद्योग लगा, न खेती

    सिंगुर की मौजूदा स्थिति पर तापस राय ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में वहां न तो उद्योग स्थापित हो सका और न ही खेती का काम ठीक से हो पाया। नई सरकार सिंगुर को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है।

    उद्योग मंत्री ने पिछली सरकार पर सिंगुर के मामले में जबरन निर्णय थोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां जो कुछ हुआ, वह बलपूर्वक किया गया था। राय ने दावा किया कि टाटा और कुमारमंगलम बिड़ला जैसे बड़े औद्योगिक समूहों के अलावा पिछले वर्षों में 6,688 छोटी-बड़ी कंपनियां बंगाल छोड़कर चली गईं। उन्होंने इसके लिए पूर्ववर्ती वाममोर्चा और तृणमूल सरकारों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

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    11 अगस्त को नवान्न में उद्योग जगत के साथ महत्वपूर्ण बैठक

    बंगाल सरकार नई औद्योगिक नीति को भी जल्द अंतिम रूप देने की तैयारी में है। उद्योग मंत्री ने बताया कि नई नीति को लेकर 11 अगस्त को राज्य सचिवालय में उद्योग जगत के विभिन्न हितधारकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

    इस बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों से नई नीति को लेकर सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद नई औद्योगिक नीति को मंत्रियों के समूह के समक्ष रखा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे मंत्रिमंडल (कैबिनेट) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

    औद्योगिक परियोजनाओं के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजेगा राज्य

    केंद्र सरकार की ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ यानी ‘भव्य’ के तहत भी राज्य ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। उद्योग मंत्री ने बताया कि ‘भव्य’ योजना के तहत नदिया जिले के धुबुलिया और आसनसोल के ढाकेश्वरी में औद्योगिक परियोजनाओं के प्रस्ताव इसी महीने राज्य सरकार केंद्र को भेजेगी।

    उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रस्ताव भेजने की मूल समय सीमा जुलाई और अगस्त थी, जिसे बाद में बढ़ाकर सितंबर तक कर दिया गया है। राज्य सरकार अगस्त में ही केंद्र को औपचारिक पत्र भेज रही है। इसके तहत नदिया के धुबुलिया में 118.5 एकड़ भूमि तथा आसनसोल के ढाकेश्वरी क्षेत्र में उपलब्ध 193.29 एकड़ में से 148.61 एकड़ भूमि को चिह्नित किया गया है। दोनों स्थानों के विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे।

    ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना की सफलता के बाद केंद्र ने देश में औद्योगिक ढांचे और निवेश को बढ़ावा देने के लिए 33,660 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली यह योजना शुरू की है। इसमें राज्य सरकार और निजी निवेशकों की संयुक्त भागीदारी होगी।

    तापस रॉय ने कहा कि योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी औद्योगिक आधारभूत ढांचा पहले से होना चाहिए, लेकिन पिछली सरकार से राज्य को न तो कोई भूमि बैंक मिला और न ही स्पष्ट औद्योगिक नीति। यहां तक कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए आवश्यक एजेंसी भी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए वर्तमान सरकार को कई व्यवस्थाएं शून्य से तैयार करनी पड़ रही हैं।