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    VIDEO: अभिषेक बनर्जी पर फूटा जनता का गुस्सा, ‘चोर’ के नारों के बीच चले चप्पल, जूते और डंडे

    Updated: Sat, 30 May 2026 08:24 PM (IST)

    तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने हमला किया, जहां वे चुनाव बाद हिंसा पीड़ितों से मिलने गए ...और पढ़ें

    HighLights

    1. अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे के दौरान हमला हुआ

    2. हिंसा में मारे गए तृणमूल कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिलने निकले थे नेता

    3. रास्ते भर विरोध, अंडे-जूते फेंके गए, शर्ट फटी, हेलमेट पहनकर पहुंचे पीड़ित परिवार तक

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार चुनावोत्तर हिंसा के पीड़ित पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिलने निकले पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे व तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को शनिवार को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में अभूतपूर्व जनविरोध का सामना करना पड़ा।

    रास्ते भर ‘चोर-चोर’ और ‘गो बैक’ के नारों के बीच उनका काफिला घिर गया। प्रदर्शनकारियों ने उन पर अंडे और जूते-चप्पल फेंके, धक्का-मुक्की की, यहां तक कि उनकी सफेद कमीज के बटन टूट गए और कपड़े फट गए।

    हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि अपनी सुरक्षा के लिए तृणमूल नेता को आनन-फानन में क्रिकेट खेलने वाला हेलमेट सिर पर पहनना पड़ा। रास्ते में कई जगह महिलाओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए, जिसके कारण उन्हें अपनी चार पहिया गाड़ी छोड़कर मोटरसाइकिल का सहारा लेना पड़ा।

    पीड़ित परिवार के घर डटे अभिषेक, 'डबल इंजन' पर साधा निशाना

    सोनारपुर पहुंचने से पहले कामलगाजी इलाके में महिलाओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जैसे ही अभिषेक सोनारपुर में दाखिल हुए, विरोध और उग्र हो गया। भीड़ ने उन्हें घेर लिया और लगातार अंडे फेंके गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धक्का-मुक्की और हाथापाई में उनकी घड़ी और चश्मा भी क्षतिग्रस्त हो गए।

    भारी विरोध के बावजूद अभिषेक अंततः चुनाव बाद हिंसा में मारे गए तृणमूल कार्यकर्ता संजू कर्मकार के घर पहुंचे। वहां उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में “डबल इंजन सरकार” के नाम पर विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वे वहां से चले जाते तो पीड़ित परिवार और अधिक असुरक्षित हो जाता।

    देरी से निकलने पर तृणमूल के भीतर ही उठे सवाल

    इससे पहले अभिषेक ने कोलकाता के बेलेघाटा में चुनाव परिणाम घोषित होने की रात मारे गए तृणमूल कार्यकर्ता विश्वजीत पटनायक के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को कानूनी सहायता का भरोसा दिलाया और आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा समर्थक लगातार तृणमूल कार्यकर्ताओं को धमका रहे हैं।

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    हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि चुनाव परिणाम के बाद हिंसा की घटनाओं के बावजूद अभिषेक को प्रभावित परिवारों तक पहुंचने में 26 दिन क्यों लग गए। विपक्ष इसे तृणमूल नेतृत्व की राजनीतिक मजबूरी बता रहा है, जबकि तृणमूल इसे संघर्षरत कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने की शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।

    मुझे मार डालना चाहते थे- अभिषेक बनर्जी

    सोनापुर में हमले व विरोध प्रदर्शन को लेकर अभिषेक बनर्जी ने बाद में मीडिया से कहा कि वे मुझे मार डालना चाहते थे। पूरी घटना कैमरे में कैद है। हम इस मामले को लेकर हाई कोर्ट और राज्यपाल के पास जाएंगे। उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य प्रशासन और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को सत्ता संभाले एक महीना भी नहीं हुआ और राज्य में डर का माहौल बना दिया गया है।

    पीड़ित कार्यकर्ताओं के परिवार से मिलने के बाद अभिषेक ने कहा कि भाजपा भले ही अपने गुंडों को बचा ले, लेकिन वे इंसाफ के लिए यह लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं तृणमूल नेता व राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ'ब्रायन ने केंद्र सरकार को घेरते हुए पूछा कि मतगणना के दिन ही अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा क्यों हटाई गई? उन्होंने गृह मंत्री से इस पर जवाब मांगा है।