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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 31, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Ankita Bhandari Murder Case: देवभूमि की शांत वादियों में फूटा था आक्रोश, पूरे उत्‍तराखंड में आंदोलित रहे लोग

    Updated: Sat, 31 May 2025 12:37 PM (IST)

    Ankita Bhandari Murder Case अंकिता भंडारी हत्याकांड ने देवभूमि को झकझोर दिया था। वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली अंकिता की हत् ...और पढ़ें

    Ankita Bhandari Murder Case: हत्याकांड के पौने तीन साल बाद भी बरकरार है प्रदेश में जनाक्रोश। जागरण आर्काइव
    Ankita Bhandari Murder Case: हत्याकांड के पौने तीन साल बाद भी बरकरार है प्रदेश में जनाक्रोश। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. अंकिता हत्याकांड देवभूमि में आक्रोश बरकरार |
    2. आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा |
    3. उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी |

    अंकुर अग्रवाल, जागरण देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड। देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में घटी एक ऐसी आपराधिक घटना, जिसे शायद ही कोई भुला पाएगा। पौड़ी जिले की एक 19-वर्षीय युवती अंकिता, जो अपने बूढ़े एवं आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता को संबल देने और खुद का भविष्य संवारने के लिए वनंतरा रिसार्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी के लिए पहुंची।

    यह रिसार्ट ऋषिकेश से लगे पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लाक में पड़ता है। 28 अगस्त 2022 को ज्वाइनिंग और 18 सितंबर 2022 को महज 20 दिन की नौकरी के बाद रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हुई अंकिता का शव जब छह दिन बाद चीला नहर में मिला तो जनाक्रोश ने तमाम बंदिशें तोड़ डालीं। सड़क से लेकर सदन और प्रदेश से लेकर देश के कोने-कोने तक इस हत्याकांड की गूंज सुनाई दी थी।

    पुलिस की जांच पर असंतोष के बाद विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन और फिर जिस तरह घटना में परतें उघड़ती रहीं, उससे सभी को उम्मीद थी कि एक दिन अंकिता को न्याय जरूर मिलेगा। 26 महीने तक इस मामले की न्यायालय में सुनवाई हुई।

    इस दौरान अभियोजन ने कुल 47 गवाह, जबकि बचाव पक्ष से चार गवाह प्रस्तुत किए। गत 19 मई को मामले में सुनवाई पूरी हुई और न्यायालय ने सजा सुनाने के लिए 30 मई की तिथि निर्धारित की। हत्यारों को फांसी दिए जाने की मांग की जा रही थी, लेकिन साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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    हालांकि, अंकिता के माता-पिता अभी भी फांसी की मांग को उच्च न्यायालय में अपील की बात कह रहे हैं। बता दें कि इस मामले में सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न उठते रहे हैं। स्थिति यह रही कि बेटी की गुमशुदगी लिखवाने के लिए एक मजबूर पिता को पौड़ी व मुनिकीरेती से लेकर ऋषिकेश तक के चक्कर लगवाए गए, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।

    मामले में दबाव बढ़ा तो इसे राजस्व पुलिस से नागरिक पुलिस को सौंप दिया गया। इसके बाद पुलिस ने पुलकित आर्य और उसके दो अन्य साथी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया। इसके बाद 24 सितंबर को जब चीला नहर से अंकिता का शव बरामद हुआ तो आक्रोशित जनसमूह सड़कों पर उतर आया।

    आरोपितों की गाड़ी पलटाने का किया था प्रयास

    24 सितंबर को हजारों की भीड़ ने सड़क पर उतरकर आरोपितों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। जब पुलिस आरोपितों को न्यायालय में पेश कर जेल ले जा रही थी तो आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के वाहन पर हमला कर आरोपितों को घेर लिया। आरोपितों की जमकर पिटाई करने के साथ भीड़ ने पुलिस की गाड़ी को खाई में पलटाने का प्रयास भी किया। पुलिस ने बामुश्किल आरोपितों को भीड़ से बचाकर जेल पहुंचाया।

    'जस्टिस फार अंकिता' से जुड़ते गए लोग

    हत्यारों को कठोरतम सजा दिलाने की मांग को लेकर ‘जस्टिस फार अंकिता’ कमेटी बनाई गई और बीते पौने तीन साल से इसी कमेटी के बैनर तले न्याय की लड़ाई लड़ी गई। स्थिति यह रही कि अंकिता की हत्या को एक वर्ष पूरा होने के बाद पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग व टिहरी लेकर से ऋषिकेश व देहरादून तक मशाल जुलूस निकाले गए।

    श्रीनगर गढ़वाल के गोला पार्क में प्रदर्शनकारी न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता के साथ धरने पर बैठे रहे। अंकिता के लिए न्याय की यह लड़ाई शुक्रवार को न्यायालय का फैसला आने तक जारी रही। जनाक्रोश शुक्रवार को भी वैसा ही दिखा, जैसा पौने तीन साल पहले इस घटनाक्रम के बाद दिखाई दिया था।